बरेली : यूपी के बरेली के सात गांवों के 656 किसानों ने ग्रेटर बरेली आवासीय योजना के लिए अपनी जमीन बीडीए (Bareilly Development Authority) को देने से साफ इंकार कर दिया है। हालांकि, बीडीए का दावा है कि उसने परियोजना को 12 सेक्टरों में बांटकर अधिकांश भूमि का विक्रय/आवंटन कर दिया है। विशेष अध्याप्ति अधिकारी (SLAO) ने इन किसानों को 3 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट में तलब किया है। इसमें किसानों का कहना जमीन नहीं देंगे किसी कीमत पर वालीपुर अहमदपुर के किसान मनोज कुमार ने कहा कि उनकी 0.5940 हेक्टेयर जमीन बरेली-बीसलपुर मार्ग से सटी है और बेहद कीमती है, इसलिए वे इसे बीडीए को नहीं देंगे।
अहरोला गांव की रितु भूटानी ने भी अपनी 0.4055 हेक्टेयर जमीन देने से इनकार किया है। उनका कहना है कि इस पर हॉस्पिटल बनाने की योजना है, जिसका नक्शा बीडीए ने ही 2021 में पास किया था। कई किसानों का आरोप है कि बीडीए ने पहले उनकी जमीन अधिग्रहीत कर ली, लेकिन मुआवजा अब तक नहीं दिया।
किसानों का आरोप- वादों के बावजूद कार्रवाई नहीं
किसानों ने कहा कि बीडीए अभी तक रामगंगानगर आवासीय योजना को पूरी तरह विकसित नहीं कर पाया। नागरिक सुविधाओं की कमी और अधूरे भुगतान को लेकर किसान नाराज़ हैं। किसानों का आरोप है कि “बीडीए पुरानी योजनाओं को पूरा करने के बजाय नई टाउनशिप में जुटा है।
सात गांवों की जमीन पर विवाद
गांव का नाम भूमि (हेक्टेयर)
वालीपुर अहमदपुर 13.3167
मोहनपुर उर्फ रामनगर 6.7085
अहरोला 6.3377
नवदिया झादा 2.8122
इटौआ 2.0284
किचौली 1.4593
कन्थरी 0.1390
कुल भूमि 32.7918
जानें अधिकारियों की बात
विशेष अध्याप्ति अधिकारी (SLAO) देश दीपक सिंह का कहना है किसान जमीन क्यों नहीं देना चाहते, इसे समझने के लिए नोटिस भेजा गया है। उनकी आपत्तियों का निस्तारण कर जमीन बीडीए को उपलब्ध कराई जाएगी।
