फांसी के फंदे पर रामप्रसाद बिस्मिल के गुनगुनाने से मिली गजल को पहचान,अंग्रेजों के लिए खौफ़, और हिंदुस्तानियों के लिए जज़्बा
लेखक
मुहम्मद साजिद
“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…”यह पंक्तियाँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन बन गई थीं। शहीद राम प्रसाद बिस्मिल ने इन्हें फांसी के तख़्ते पर गुनगुनाया और यह गीत नौजवान क्रांतिकारियों के लिए जुनून बन गया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस इस क्रांतिकारी ग़ज़ल के रचनाकार पटना (तत्कालीन अज़ीमाबाद) के शायर और स्वतंत्रता सेनानी सैयद शाह मोहम्मद हसन ‘बिस्मिल अज़ीमाबादी’ थे। उन्होंने यह ग़ज़ल 1920 में लिखी थी। 1921 में कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार इसे सार्वजनिक किया गया।
गिरफ्तारी के डर से छिपाया सच
यह ग़ज़ल पत्रिका “सबाह” (दिल्ली) में प्रकाशित हुई, उस पर अंग्रेज़ों ने छापा मारा, और लेखक की गिरफ्तारी के वारंट जारी हुए। अंग्रेज़ों के डर और पारिवारिक दबाव के कारण बिस्मिल अज़ीमाबादी ने करीब 40 साल तक इस सच को छिपाए रखा। आखिरकार 1960 के बाद उन्होंने ख़ुद स्वीकारा कि “सरफ़रोशी की तमन्ना” उन्हीं की लिखी हुई ग़ज़ल थी। मगर, जब शहीद राम प्रसाद बिस्मिल ने इस ग़ज़ल को फांसी से पहले गुनगुनाया, तो लोग समझ बैठे कि यही उनकी रचना है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि बिस्मिल अज़ीमाबादी ने इसे लिखा था और “बिस्मिल” तख़ल्लुस की वजह से दोनों नाम मिल जाने से यह भ्रांति फैल गई।
जंग-ए-आजादी के नायकों में भर दिया जोश
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले सैयद शाह मोहम्मद हसन ‘बिस्मिल अज़ीमाबादी’ का जन्म पटना (अज़ीमाबाद) में 1901 में हुआ था। उन्होंने अरबी -फ़ारसी की तालीम घर पर ली। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता गए। 20 जून, 1978 को इंतकाल (निधन) हो गया। उनके गुरु मशहूर शायर शाद अज़ीमाबादी थे। उर्दू अदब और आज़ादी की शायरी को मिलाकर नौजवानों में जज़्बा पैदा करने के लिए यह गजल लिखी गई थी।
हिंदुस्तानी अवाम के दिलों में जोश और कुर्बानी की मिसाल
“सरफ़रोशी की तमन्ना” ने भगत सिंह, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ान, राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को प्रेरित किया। यह कविता आज भी हिंदुस्तानी अवाम के दिलों में जोश और कुर्बानी की मिसाल है। खुदाबख़्श लाइब्रेरी (पटना) में इस ग़ज़ल की असली पांडुलिपि आज भी संरक्षित है। उनकी “बिस्मिल अज़ीमाबादी: हयात और तख़लीक़ात” उर्दू शोध पुस्तक और खुदाबख़्श ओरिएंटल लाइब्रेरी, पटना के अभिलेख में गजल है, तो वहीं इसका जिक्र Patna के History and Legacy यानी स्थानीय इतिहास पर आधारित दस्तावेज़ है।
