ऐतिहासिक-धार्मिक यात्रा के दौरान अक्षयवट और सरस्वती कूप के भी किए दर्शन, यूपी को किले के स्थानांतरण की उठाई मांग
लखनऊ / प्रयागराज : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की हालिया प्रयागराज (इलाहाबाद) यात्रा ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रही। वह रविवार यानी 20 अप्रैल को प्रयागराज के भुजौली क्षेत्र में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। यहां उन्हें जनता का भरपूर स्नेह और समर्थन मिला। सपा प्रमुख के स्वागत में प्रयागराज की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। दो दर्जन से अधिक मार्गों पर लोग समाजवादी झंडे और फूलमालाओं के साथ खड़े नजर आए। छात्र, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग, सभी ने अपने नेता के प्रति अपार उत्साह दिखाया। नारों और जयघोष से माहौल गूंज उठा।
विवाह समारोह में दी शुभकामनाएं, कई प्रमुख नेता रहे मौजूद

पूर्व मुख्यमंत्री ने नवविवाहित युगल को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद नरेश उत्तम पटेल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा, पूर्व मंत्री राजेन्द्र चौधरी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक उपस्थित रहे।
अकबर के किले और अक्षयवट के दर्शन, गहराई से की ऐतिहासिक स्थल की पड़ताल

प्रयागराज की यह यात्रा सिर्फ एक सामाजिक उपस्थिति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें धार्मिक और ऐतिहासिक खोज का भी विशेष स्थान रहा। अखिलेश यादव ने प्रयागराज स्थित अकबर के किले, अक्षयवट, और सरस्वती कूप के दर्शन किए और इन स्थलों की आध्यात्मिक महत्ता पर गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने प्रसिद्ध अक्षयवट की पूजा की, जिसे मनोरथ वृक्ष भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह वृक्ष 5270 वर्ष पुराना है और यहाँ कई महान ऋषियों जैसे ऋषि मार्कंडेय, शुकदेव, व्यास, भारद्वाज आदि ने तपस्या की थी। जैन समाज के अनुसार, प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देव ने भी यहीं तप किया था।
सरस्वती कूप: अदृश्य सरस्वती नदी का प्राचीन उद्गम स्थल

सरस्वती कूप का भी दर्शन किया। इसको सरस्वती नदी के गुप्त प्रवाह का उद्गम स्थल माना जाता है। यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से प्रयागराज की यात्रा का एक महत्वपूर्ण अंग है।
अकबर के किले के गस्थानांतरण की फिर दोहराई मांग

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बार-बार यह मांग उठाई है कि केंद्र सरकार को अकबर के ऐतिहासिक किले को उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप देना चाहिए। जिससे यहां धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार किया जा सके। उन्होंने किले के भीतर स्थित जोधाबाई महल, जहांगीर महल, अशोक स्तंभ, और सुरंग मार्गों का भी उल्लेख किया। कहा जाता है कि किले के निर्माण में 40 वर्षों का समय लगा था और 5,000 से 20,000 श्रमिकों ने काम किया था। इसकी लागत उस समय करीब 6 करोड़ 17 लाख रुपये बताई जाती है।
आध्यात्मिक स्थलों के प्रति आस्था

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रयागराज के अन्य धार्मिक स्थलों जैसे लेटे हुए हनुमान जी के भी दर्शन किए और साधु-संतों से भेंट कर आध्यात्मिक चर्चा की। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष की यह यात्रा आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक मूल्यों को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है।
