लेखक मुहम्मद साजिद
14 अगस्त 1947… तारीख़ जो भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में खून, आंसुओं और दर्द से लिखी गई। यह वह दिन था जब भारत का विभाजन हुआ, और पाकिस्तान का जन्म। मगर, इसके बाद 15 अगस्त को भारत ने स्वतंत्रता पाई। लेकिन यह सिर्फ़ भूगोल का नहीं, दिलों, परिवारों, रिश्तों और भावनाओं का बंटवारा था। जिसका दर्द आज भी लोग झेल रहे हैं। पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) भी इसी विभाजन की उपज था, जो 1971 में अलग होकर स्वतंत्र राष्ट्र बना।
विभाजन का अनकहा सच- संपत्ति से लेकर हाथी और बग्घी तक बंटवारा
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लेखक H.M.Patel की किताब Rites of Passage के मुताबिक विभाजन केवल ज़मीन या जनसंख्या का मामला नहीं था, बल्कि छोटी से छोटी वस्तु तक का बंटवारा हुआ। इसमें कुर्सी, मेज़, पुस्तकें, टेबल लैंप, टाइपराइटर, रायफल, यहां तक कि हाथी, बग्घियां और पगड़ी तक। पैसों में, भारत की 400 करोड़ रुपये की संपत्ति में से पाकिस्तान को 75 करोड़ रुपये मिले। इसमें से पहले 20 करोड़ रुपये दिए गए। मगर कश्मीर विवाद के कारण बाकी 55 करोड़ रुपये रोक दिए गए, लेकिन गांधी जी के दबाव और अनशन के बाद जनवरी 1948 में पाकिस्तान को दिए गए।
फौज का बंटवारा-धर्म और वफ़ादारी की कसौटी
14 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश भारतीय सेना को खत्म करने का आदेश जारी हुआ। लेखक H.M. Patel किताब के अनुसार उस वक्त शर्त रखी गई कि मुस्लिम सैनिक पाकिस्तान और गैर-मुस्लिम सैनिक भारत की फौज में शामिल हों। हालांकि, कुछ को स्वतंत्र विकल्प मिला। इसमें से 554 मुस्लिम अधिकारी भारत में रहे। जिनमें ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान जैसे नाम शामिल थे।
सोने-चांदी की बग्घी का सिक्का उछालकर फ़ैसला
Freedom at Midnight किताब के अनुसार, वायसराय के पास 12 शानदार बग्घियां थीं। इसमें 6 सोने की, और 6 चांदी की। दोनों देश सोने की बग्घी पर अड़े रहे। आखिरकार सिक्का उछाला गया, और सोने की बग्घी भारत को, चांदी की पाकिस्तान को मिली।
हाथी जॉयमनी-एक जानवर, दो देशों का झगड़ा
अन्वेषा सेनगुप्ता के शोध (Breaking up: Dividing Assets…) में वर्णित है कि बंगाल का वन विभाग हाथी जॉयमनी और एक स्टेशन वैगन के बंटवारे पर उलझा। पश्चिम बंगाल को कार और पूर्वी बंगाल को हाथी देना तय हुआ, लेकिन जॉयमनी पश्चिम बंगाल में थी। इससे महीनों विवाद चला।
रेडक्लिफ का कबूलनामा- “मैंने लाहौर पाकिस्तान को दे दिया”
सीमा आयोग के अध्यक्ष सर सायरल रेडक्लिफ ने कुलदीप नैयर की किताब Scoop! में माना है कि “तथ्यों के आधार पर लाहौर भारत का होना चाहिए था, लेकिन पाकिस्तान के पास कोई बड़ा शहर नहीं था। इसलिए मैंने उसे पाकिस्तान को दे दिया।” यह फैसला 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक हुआ, ताकि स्वतंत्रता दिवस पर दोनों देशों का उत्साह न टूटे।
विभाजन की विरासत-ज़ख्म जो अब भी रिसते हैं
1947 का यह बंटवारा लाखों मौतों, करोड़ों लोगों के विस्थापन और मानव सभ्यता के सबसे बड़े पलायन का कारण बना। आज भी 14 अगस्त का दिन सिर्फ पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में नहीं, बल्कि भारत मां के सीने पर पड़े गहरे घाव की याद दिलाता है। बरेली के महताब अहमद खां कहते हैं अंग्रेजों की एक गलत नीति से हिंदुस्तान को बड़ा नुकसान हुआ। आज हम दुनिया में सबसे तरक्की वाले मुल्क में शामिल होते, लेकिन बंटवारे से बड़ा नुकसान हुआ, और हमेशा का दर्द मिला।
