नई दिल्ली/भोपाल/लखनऊ : मध्य प्रदेश सहित देशभर में बुधवार को किसानों और मजदूर संगठनों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाए और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (CETA) की प्रतियां दहन कीं। यह प्रदर्शन ‘बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत छोड़ो-कॉरपोरेट कृषि छोड़ो दिवस’ और भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं वर्षगांठ के मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित किया गया।
केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों का आरोप
देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित इन प्रदर्शनों में दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों, खेत-मजदूर संघों और अन्य किसान संगठनों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे और मोदी सरकार पर कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों का आरोप लगाया।
यह हैं किसानों के आरोप
किसानों ने लाभकारी MSP, और कर्जमाफी से इनकार किया। पिछले तीन बजटों में 85,000 करोड़ की खाद सब्सिडी में कटौती। मनरेगा फंड में कमी, कृषि संकट गहरा। रोज़ाना 31 किसान आत्महत्या करने को मजबूर। फसल बीमा कंपनियों द्वारा प्रीमियम वसूली में भारी लूट आदि के आरोप लगाए।
कॉरपोरेट लूट रोकने को आंदोलन : डॉ.सुनीलम
राष्ट्रीय किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.सुनीलम ने कहा कि बीना, इंदौर, छिंदवाड़ा, रीवा, ग्वालियर, सिवनी, मुलताई, राजगढ़ और रायसेन में बड़े स्तर पर पुतला दहन, जुलूस और ज्ञापन सौंपने की गतिविधियां हुईं हैं। बीना में किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने कहा, “जैसे पंजाब, कर्नाटक और केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लंबी लड़ाइयों में किसानों ने जीत हासिल की। अब यह आंदोलन अंतरराष्ट्रीय समझौतों के जरिए हो रही कॉरपोरेट लूट को रोकने के लिए है।”रीवा, ग्वालियर और छिंदवाड़ा में नेताओं ने अडानी समूह और मुक्त व्यापार समझौतों के खिलाफ भी नारे लगाए।
संयुक्त किसान मोर्चा ने दी चेतावनी
इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों को लाभकारी मूल्य, मजदूरों को न्यूनतम जीविका मज़दूरी, कर्ज़मुक्ति और कॉरपोरेट लूट रोकने की मांगें तुरंत नहीं मानीं, तो पूरे भारत में लंबे, उग्र और विशाल आंदोलन होंगे।
