बरेली : शहर की दरगाह नासिर मियां परिसर (नौमहला शरीफ) में रविवार सुबह से ही अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ रही थी। साबिरी महफ़िल में कब्वालों ने हज़रत साबिर पाक की शान में कलाम पेश किए, और साबरी लंगर के बाद दोपहर 1 बजे बरेली से कलियर शरीफ के लिए 37वां पैदल झंडा काफिला रवाना हुआ। यह काफिला हज़रत साबिर पाक रहमतुल्लाह अलेह के 757वें उर्स के आगाज़ का प्रतीक है। सूफी वसीम मियां साबरी नासरी और हज़रत शाने अली कमाल मियां साबरी नासरी ने बताया कि यह परंपरा हर वर्ष दरगाह ख़्वाजा नासिर मियां से शुरू होती है, और 23 अगस्त को कलियर शरीफ पहुंचती है। यहां 24 अगस्त की सुबह सज्जादानशीन हज़रत शाह अली एजाज़ कुद्दूसी साबरी अलीशाह मियां के दस्ते मुबारक से झंडा कुशाई की रस्म अदा की जाएगी।
काफिले का अमन का पैगाम
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https://youtu.be/rE8Ya9jDDbU?si=g7cMA9Cqi7KEP1Y3
पैदल काफिला हाथों में बैनर लेकर हिंदुस्तान के लोगों को अमन और भाईचारे का संदेश दे रहा है। उनका कहना है, एक रहो, नेक बनो, सौहार्द के लिए एकजुट रहो, पड़ोसी का ख़्याल रखो, सोशल मीडिया की गलत पोस्ट को इग्नोर/डिलीट करो, संविधान और सुरक्षा की रक्षा करो, गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करो आदि पैगाम दिया गया।
काफिले का फूलों से स्वागत
शहर में काफिले का जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया। काफिला नॉवल्टी चौराहा, कुतुबखाना, किला, रामपुर, मुरादाबाद, हरिद्वार, ज्वालापुर होते हुए कलियर शरीफ पहुंचेगा। रास्ते में नॉवल्टी चौराहे पर बरेली हज सेवा समिति ने फूलों से इस्तक़बाल किया। कुतुबखाना, किला और अन्य स्थानों पर स्थानीय कमेटियों ने स्वागत किया। पम्मी खां वारसी ने बताया कि कार्यक्रम में कलियर शरीफ, पानीपत और बरेली के कई सज्जादानशीन, समाजसेवी और बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
