व्हाट्सएप कॉल से फंसाया, CBI अधिकारी बनकर डराया और उड़ाए करोड़ों
बरेली / लखनऊ : यूपी के बरेली में साइबर थाना पुलिस ने एक बड़ी साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया है। आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) के रिटायर्ड वैज्ञानिक को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर धमकाकर ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने लखनऊ निवासी आरोपी सुधीर कुमार चौरसिया, श्याम कुमार वर्मा, महेंद्र प्रताप सिंह और गोंडा निवासी रजनीश द्विवेदी को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 4 चेकबुक, 6 डेबिट कार्ड और 6 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। गिरोह द्वारा ठगे गए पैसे को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेजा गया।
जानें कैसे की डिजिटल अरेस्ट ठगी
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17 जून को वैज्ञानिक के मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाला खुद को बंगलूरू पुलिस अधिकारी बताकर बोला कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग मानव तस्करी व फर्जी नौकरी घोटालों में हुआ है। इसके बाद उन्हें एक नकली CBI अधिकारी “दया नायक” से बात कराई गई। उस व्यक्ति ने कहा कि वैज्ञानिक के खातों में अवैध पैसा है, और उन्हें सारे पैसे एक ‘सुरक्षित सरकारी खाते’ में ट्रांसफर करने होंगे ताकि जांच की जा सके। ठगों ने वैज्ञानिक को भरोसे में लेने के लिए एक लाख रुपये वापस भी ट्रांसफर किए। इसके बाद उन्होंने 19 जून तक 1.29 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए। रकम को निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया गया और विदेश भेज दिया गया।
जब असली बंगलूरू पुलिस से बात हुई, तब खुली साजिश की पोल
ठगे जाने के कुछ दिनों बाद वैज्ञानिक को शक हुआ। उन्होंने गूगल पर नंबर खोजने की कोशिश की, पर कोई जानकारी नहीं मिली, तब उन्होंने असली बंगलूरू पुलिस से संपर्क किया, जिन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी तरह की जांच नहीं कर रहे और यह पूरा मामला साइबर फ्रॉड है।इसके बाद बरेली साइबर थाना में रिपोर्ट दर्ज की गई और STF लखनऊ के सहयोग से गिरफ्तारी की गई।
पुलिस ने क्या कहा?
एसपी क्राइम मनीष कुमार सोनकर ने कहा कि यह मामला अत्यंत संगठित साइबर अपराध का है, जिसमें देशभर के शिक्षित और संवेदनशील वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों से और भी जानकारी निकाली जा रही है, और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
सावधान रहें! ऐसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड से खुद को कैसे बचाएं?
कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप कॉल पर जांच नहीं करती है। बैंक या आधार की जानकारी किसी से साझा न करें। संशय होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।किसी भी डराने-धमकाने वाली कॉल पर विश्वास न करें।
