“देश के लिए जिन्होंने जान दी, उन्हें भूलना गुनाह होगा”: एडवोकेट इमरान अंसारी
फतेहगंज पश्चिमी/बरेली : भारत मां के अमर सपूत, परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की यौम-ए-पैदाइश (जयंती) मंगलवार को एडवोकेट इमरान अंसारी के आवास पर पूरे सम्मान और देशभक्ति की भावना के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों और युवाओं ने एकत्र होकर उनके बलिदान को याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।
धामुपुर से रणभूमि तक, एक वीर की अमर कहानी
कार्यक्रम में बोलते हुए एडवोकेट इमरान अंसारी और डॉ. गयास अहमद ने बताया कि वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धामुपुर गांव में हुआ था। गरीब परिवार में जन्मे हमीद ने कम उम्र में ही फौज में भर्ती होकर देशसेवा की राह चुनी। 1965 की भारत-पाक जंग में उन्होंने सात अमेरिकी पैटन टैंकों को अकेले नष्ट कर पाकिस्तानी सेना की रीढ़ तोड़ दी थी। इस वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार ‘परमवीर चक्र’ प्रदान किया गया।
“वीर हमीद की गाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी”
जयंती समारोह में वक्ताओं ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद सिर्फ एक सैनिक नहीं, भारत के गौरव का प्रतीक हैं। देश की एकता, सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए दिए गए उनके बलिदान को पीढ़ी दर पीढ़ी याद रखना चाहिए। युवाओं को उनके जीवन से देशभक्ति, त्याग और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा लेनी चाहिए।
जयंती समारोह में मौजूद रहे ये सम्मानित चेहरे
इस दौरान एडवोकेट इमरान अंसारी, डॉ. गयास अहमद, आफताब आलम, दक्ष गंगवार, असद अंसारी, सरदार अजहरी, अनस खान, मुरब्बत अली, आकाश मौर्य, मयंक गंगवार,इलियास अंसारी, वसीम अंसारी समेत अन्य स्थानीय नागरिक मौजूद थे। इन सभी ने वीर अब्दुल हमीद के चित्र पर खिराज ए अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की।
युवा पीढ़ी को प्रेरित करने की अपील
कार्यक्रम में यह भी निर्णय लिया गया कि क्षेत्रीय विद्यालयों और कॉलेजों में वीर अब्दुल हमीद की वीरगाथा को पहुंचाने के लिए विशेष व्याख्यान व प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा ताकि युवा उनका आदर्श जीवन अपनाएं।
