बरेली : प्रदेश सरकार के स्कूल मर्जर फैसले के खिलाफ बरेली में शिक्षा बचाने की जंग शुरू हो चुकी है। सोमवार को परिवर्तनकामी छात्र संगठन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्राएं कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचीं और स्कूल बंद करने की योजना के विरोध में ज्ञापन सौंपा। छात्राओं ने चेताया कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन व्यापक स्तर पर किया जाएगा। उनका आरोप था कि यह योजना गरीब, वंचित, आदिवासी और दलित समुदायों के बच्चों की शिक्षा के मौलिक अधिकार पर हमला है।
जानें पूरा मामला
प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हवाला देते हुए प्रदेश के 27,000 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को मर्ज कर रही है। बरेली जिले के 617 सरकारी विद्यालय इस निर्णय से प्रभावित हो रहे हैं। मर्जर के पीछे सरकार का तर्क है कि 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों को नजदीकी स्कूल में मिलाकर बेहतर संसाधन और गुणवत्ता दी जा सकेगी।
छात्राओं का तर्क: गांवों में स्कूल बंद होंगे, तो शिक्षा भी छूटेगी
छात्राओं ने कहा कि इस निर्णय से सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चे होंगे, जिन्हें दूर-दराज के स्कूलों तक जाने में समस्या होगी। कई बच्चों, खासकर छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो सकती है, क्योंकि लंबी दूरी की वजह से अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने से हिचक सकते हैं।
संविधान और शिक्षा अधिकार कानून का उल्लंघन
छात्र संगठन ने ज्ञापन में साफ किया कि यह फैसला शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 6 का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि हर गांव या क्षेत्र में 1 किमी की परिधि में एक प्राथमिक विद्यालय होना जरूरी है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 21-A (शिक्षा का मौलिक अधिकार) और अनुच्छेद 46 (नीति निदेशक तत्व) की भावना को भी ठेस पहुंचती है।
शिक्षकों की नौकरी और युवाओं का भविष्य भी संकट में
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इस निर्णय से लाखों स्थाई शिक्षकों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। साथ ही जो युवा शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए रोजगार के अवसर सीमित हो जाएंगे।
यह है छात्राओं की मांग
प्रदेश सरकार यह जनविरोधी निर्णय तुरंत वापस ले। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की संख्या घटाने की बजाय गुणवत्ता बढ़ाने पर ध्यान दे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की समुचित नीति लागू की जाए। छात्राओं ने यह भी कहा कि अगर सरकार ने कदम वापस नहीं लिया तो आने वाले दिनों में राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
