पूछताछ के नाम पर थाने बुलाकर एक घंटा 17 मिनट तक बंद रखने का आरोप, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सात दिन में एफआईआर की प्रति दाखिल करने के दिए निर्देश
पीलीभीत: हाईकोर्ट के अधिवक्ता को पूछताछ के नाम पर थाने बुलाकर हवालात में बंद रखने का मामला जहानाबाद पुलिस के लिए मुश्किल खड़ी कर गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने सात दिन के भीतर एफआईआर की प्रति भी दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता का आरोप है कि उन्हें बिना किसी अपराध के एक घंटा 17 मिनट तक हवालात में बंद रखा गया और दबाव बनाकर माफीनामा लिखवाया गया।
जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत के बाद थाने बुलाने का आरोप
हाईकोर्ट के अधिवक्ता रामानुज सैनी ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 27 अगस्त 2026 को एक आरक्षी ने पूछताछ के नाम पर उन्हें थाना जहानाबाद बुलाया। अधिवक्ता के मुताबिक, थाने में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने उनके साथ अभद्रता की। एक मुख्य आरक्षी ने उनके जूते, चप्पल, बटुआ और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उन्हें करीब एक घंटा 17 मिनट तक हवालात में बंद रखा गया। आरोप है कि उनके साथी अधिवक्ता के थाने पहुंचने पर दबाव बनाकर उनसे माफीनामा लिखवाया गया और फिर उन्हें छोड़ा गया। अधिवक्ता ने भविष्य में झूठे मुकदमे में फंसाकर उनका करियर बर्बाद करने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया है।
पुलिस ने अदालत में दी अलग दलील
वहीं, पुलिस की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत आख्या में बताया गया कि अधिवक्ता दो मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और ग्राहक आवेदन पत्र (सीएएफ) आईडी उपलब्ध कराने का दबाव बना रहे थे। पुलिस का कहना था कि बिना अभियोग पंजीकृत हुए यह जानकारी देना संभव नहीं था। पुलिस के अनुसार, समझाने पर अधिवक्ता ने स्वयं माफीनामा लिख दिया था।
अदालत ने एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच के दिए आदेश
दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया अधिवक्ता की स्वतंत्रता के उल्लंघन का मामला माना। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना कराने का आदेश जारी किया। साथ ही नियमानुसार जांच कर उसकी आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने और सात दिन के भीतर एफआईआर की प्रति दाखिल करने के निर्देश दिए।
रिपोर्ट: ऋतिक द्विवेदी
