नई दिल्ली : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां ने मनी लॉन्ड्रिंग के नए मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना जताई। यह मामला जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ है।
तत्काल सुनवाई से किया इनकार, इसी सप्ताह सुनवाई की संभावना
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आजम खां के वकील निजाम पाशा की दलीलों पर विचार किया। वकील ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था, लेकिन पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।
गाजियाबाद की विशेष अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
रविवार को आजम खां को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया था। जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत में पेशी के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। परिसर के बाहर उनके कई समर्थक भी मौजूद रहे।
31 अक्टूबर को ईडी ने किया था गिरफ्तार
ईडी ने 31 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आजम खां को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब वह और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम कथित तौर पर दो पैन कार्ड रखने के मामले में रामपुर जेल से जमानत पर रिहा हुए थे। ईडी ने आजम खां और अन्य लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज 58 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।
1170 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने का दावा
ईडी ने 28 अक्टूबर को बताया था कि उसने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क किया है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है।
सरकारी धन के इस्तेमाल का ईडी ने लगाया आरोप
ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। एजेंसी के मुताबिक, आजम खां ने तत्कालीन शहरी विकास मंत्री और उत्तर प्रदेश जल निगम में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया। वहीं, जुलाई में रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय की ओर से अपील दायर की गई थी। ईडी ने अगस्त में इस मामले के सिलसिले में छापेमारी कर आजम खां से पूछताछ भी की थी। अब उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संभावित सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
