बरेली: दरगाह आला हजरत में उर्स-ए-हामिदी के दूसरे दिन देशभर से हजारों अकीदतमंद पहुंचे। हुज्जतुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रजा खां साहब के 86वें कुल शरीफ की रस्म अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। इस मौके पर मदरसा मंजरे इस्लाम का 123वां दीक्षांत समारोह भी आयोजित हुआ, जिसमें 149 छात्रों को डिग्रियां देकर दस्तारबंदी की गई। कार्यक्रम दरगाह प्रमुख हजरत मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
नई नस्ल की कामयाबी के लिए इल्म और अच्छी तरबियत जरूरी: अहसन मियां
सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने अपने संदेश में कहा कि नई नस्ल की कामयाबी के लिए इल्म, अमल और अच्छी तरबियत बेहद जरूरी है। केवल किताबों का ज्ञान हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर इंसान के व्यवहार, अमल और किरदार में भी दिखाई देना चाहिए। मुफ्ती आकिल रजवी ने कहा कि इल्म इंसान में समझ और जागरूकता पैदा करता है। छात्रों को अपने लक्ष्य पर ध्यान देने के साथ शिक्षा और अच्छे व्यवहार को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। मुफ्ती अय्यूब खान ने हामिद रजा खां की इल्मी सेवाओं और फतवा लेखन के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह बड़े शायर भी थे। इस दौरान अल्लामा मुख्तार बहेड़वी और कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने भी उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
25 मुफ्ती, 62 हाफिज-कारी और 62 आलिम की हुई दस्तारबंदी
रात 10 बजकर 35 मिनट पर मुफ्ती हामिद मियां के 86वें कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद मुल्क और मिल्लत की खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने दुआ कराई। इसके बाद मदरसा मंजरे इस्लाम का दीक्षांत समारोह शुरू हुआ। दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां और मुफ्ती अहसन मियां ने 149 छात्रों को डिग्रियां सौंपीं। इनमें 25 मुफ्ती, 62 हाफिज-कारी और 62 आलिम शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन कारी यूसुफ रजा संभली ने किया। मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं के नामों की घोषणा की।
नेपाल और बिहार के छात्रों ने प्रतियोगिताओं में हासिल किए पुरस्कार
दीक्षांत समारोह के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में भी छात्रों को सम्मानित किया गया। तकरीरी मुकाबले में नेपाल के मौलाना अरशद रजा ने पहला स्थान हासिल किया। शायरी प्रतियोगिता में बिहार के मौलाना रहबर रजा और तहरीरी मुकाबले में मौलाना अरवाज रजा मंजरी को प्रथम पुरस्कार मिला। इससे पहले दिन की शुरुआत फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी से हुई। दिनभर नात और मनकबत का सिलसिला चलता रहा। शाम को मौलाना रजा-ए-रसूल, महशर बरेलवी, फारूक मदनपुरी, हाजी गुलाम सुब्हानी और आसिम नूरी ने नात-ओ-मनकबत पेश की। कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य हज समिति के सदस्य मुफ्ती मन्नान रजा विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनका स्वागत सय्यद आसिफ मियां ने किया। उर्स की व्यवस्थाओं में राशिद अली खान, मौलाना बशीर उल कादरी, मौलाना जाहिद रजा, अजमल नूरी, औरंगजेब नूरी, परवेज नूरी, शाहिद नूरी, नासिर कुरैशी, हाजी जावेद खान समेत दरगाह से जुड़े अनेक लोगों ने सहयोग किया। कार्यक्रम देर रात तक जारी रहा।
