इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सलीम को बहन की शादी में शामिल होने और उसे विदा करने के लिए 21 से 27 अक्टूबर तक पैरोल दी है। पुलिस की निगरानी में घर पहुंचे सलीम को 27 अक्टूबर की शाम तक नैनी जेल लौटना होगा, जबकि पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों ने फैसले पर नाराजगी जताई है।
अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का चर्चित बावनखेड़ी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2008 में एक ही परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में दोषी सलीम करीब 18 साल बाद पैरोल पर अपने घर पहुंचा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे अपनी बहन की शादी में शामिल होने और उसे विदा करने के लिए सात दिन की पैरोल दी है। अदालत के आदेश के मुताबिक, सलीम को 21 से 27 अक्टूबर तक पैरोल मिली है और उसे 27 अक्टूबर की शाम तक नैनी जेल वापस पहुंचना होगा। पैरोल के दौरान उसकी गतिविधियों पर पुलिस की कड़ी निगरानी रहेगी और वह केवल निर्धारित लोगों से ही मिल सकेगा।
2008 में सात लोगों की हत्या से दहल उठा था बावनखेड़ी गांव
बावनखेड़ी गांव में 14 और 15 अप्रैल 2008 की दरमियानी रात हुई सात हत्याओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। मृतकों में मास्टर शौकत अली, उनकी पत्नी हाशमी, बेटे अनीस और राशिद, बहू अंजुम, पोता अर्श और भांजी राबिया शामिल थे। जांच के दौरान सामने आया कि शौकत अली की बेटी शबनम और सलीम के बीच प्रेम संबंध थे और दोनों शादी करना चाहते थे। परिवार के लोग इस रिश्ते के खिलाफ थे। अभियोजन के मुताबिक, शबनम और सलीम ने मिलकर हत्या की साजिश रची। आरोप था कि परिवार के सदस्यों को खाने में नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया और फिर एक-एक करके सात लोगों की हत्या कर दी गई। इस मामले में दोनों को दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड सुनाया गया। सलीम नैनी जेल में बंद है, जबकि शबनम बरेली जेल में सजा काट रही है।
बहन की शादी के लिए सात दिन की पैरोल, पुलिस की निगरानी में रहेगा सलीम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सलीम को पारिवारिक समारोह में शामिल होने की अनुमति दी है। आदेश के अनुसार, उसकी पैरोल 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक प्रभावी है। इस अवधि में उसे निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा और 27 अक्टूबर की शाम तक नैनी जेल में वापस पहुंचना होगा। सलीम के घर लौटने की खबर फैलने के बाद बावनखेड़ी गांव में लोगों की भीड़ जुटने लगी। इतने वर्षों बाद उसकी वापसी ने पुराने हत्याकांड की यादें फिर ताजा कर दी हैं। हालांकि, पैरोल का अर्थ सजा समाप्त होना नहीं है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सलीम को जेल लौटना होगा।
पीड़ित परिवार के रिश्तेदार नाराज, फैसले पर उठाए सवाल
सलीम को पैरोल मिलने पर पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों ने कड़ी नाराजगी जताई है। शबनम की चाची फातमा ने कहा कि इतने वर्षों बाद भी दोषियों को फांसी नहीं दी गई और अब सलीम को पैरोल दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने परिवार के पुराने जख्म फिर से हरे कर दिए हैं। उनका कहना है कि वे दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड चाहते हैं। वहीं, शबनम के चाचा सत्तार ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि दोषियों को जल्द फांसी नहीं दी गई, तो समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का कानून पर भरोसा कमजोर हो सकता है। सलीम की पैरोल के बाद बावनखेड़ी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। पीड़ित परिवार के लिए यह मामला आज भी गहरे दुख और न्याय की प्रतीक्षा से जुड़ा हुआ है।
