चुनाव प्रचार के दौरान प्रशासन को धमकाने का था आरोप, कोर्ट में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुनवाई
लखनऊ/मऊ: विवादित बयान और आपराधिक छवि के लिए चर्चित पूर्व विधायक स्व. मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ सदर सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अब्बास अंसारी को हेट स्पीच के मामले में मऊ CJM कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई है। इस मामले में उनके चुनाव एजेंट मंसूर अंसारी को 6 माह की सजा और दोनों को दो-दो हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया गया है। शनिवार को अब्बास अंसारी अपने भाई उमर अंसारी के साथ कोर्ट में पेश हुए थे। पेशी के दौरान अदालत परिसर में भारी सुरक्षा तैनात की गई थी।
जानिए पूरा मामला:
यह मामला 3 मार्च 2022 का है, जब अब्बास अंसारी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान मऊ के पहाड़पूरा मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। सभा में अब्बास ने कथित रूप से कहा कि “सरकार बनने के बाद छह महीने तक कोई तबादला नहीं होगा, जिसने जैसा किया है, पहले उसका हिसाब होगा।” उनकी इस बयानबाज़ी को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया और उन्हें 24 घंटे के लिए चुनाव प्रचार से रोक दिया गया था। बयान को प्रशासन के लिए धमकी माना गया। जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भारी हलचल मच गई थी।
कैसे दर्ज हुआ केस?
जनसभा के कुछ ही समय बाद शहर कोतवाली के एसआई गंगाराम बिंद ने इस पर संज्ञान लेते हुए एफआईआर संख्या 97/22 दर्ज कराई। धारा PC 506 (आपराधिक धमकी), IPC 171-च (चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालना)। इस केस में अब्बास अंसारी के अलावा उनके भाइयों मंसूर और उमर अंसारी को भी आरोपी बनाया गया था।
राजनीतिक भविष्य पर संकट
सजा की घोषणा के बाद अब अब्बास अंसारी की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। भारतीय कानून के अनुसार, 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर विधायक की सदस्यता खत्म हो सकती है।अब्बास अंसारी पहले भी कई आपराधिक मामलों में आरोपी रह चुके हैं। वह घुड़सवारी के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी रहे हैं और मुख्तार अंसारी के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाते हैं।
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