गोंडा के विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद सपा के वरिष्ठ नेता से मिले निषाद पार्टी अध्यक्ष, 2027 चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को अब करीब पांच-छह महीने का समय बचा है और इसी बीच निषाद पार्टी के अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद की समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडे से मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। गोंडा के विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर चुके संजय निषाद अब माता प्रसाद पांडे से मिले हैं। मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ रिश्तों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, संजय निषाद ने भाजपा छोड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है। उन्होंने इतना जरूर कहा है कि यदि भाजपा उनके लिए दरवाजा बंद करती है तो वह आगे की राह पर विचार करेंगे।
विनोद साहनी हत्याकांड पर अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
गोंडा में निषाद पार्टी के कार्यकर्ता और व्यापारी विनोद कुमार साहनी पर पिछले सप्ताह हमला हुआ था। गंभीर हालत में उनका इलाज लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में चल रहा था, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद संजय निषाद ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने लखनऊ में केजीएमयू के पोस्टमार्टम गृह के बाहर धरना दिया था। इस दौरान विकासशील इंसान पार्टी के नेता मुकेश सहनी और समाजवादी पार्टी के नेता भी उनके साथ मौजूद रहे। इसके अगले दिन संजय निषाद ने सैकड़ों लोगों के साथ गोंडा कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया था।
माता प्रसाद पांडे से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी चर्चा
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच संजय निषाद की समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडे से मुलाकात ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या निषाद पार्टी और भाजपा के रिश्तों में खटास बढ़ रही है? क्या संजय निषाद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कोई नया राजनीतिक रास्ता तलाश रहे हैं? लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि संजय निषाद समाजवादी पार्टी के साथ जा सकते हैं। हालांकि, अभी तक उनकी ओर से भाजपा या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्या सीटों के बंटवारे को लेकर नाराजगी है?
संजय निषाद को लेकर यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर वह असंतुष्ट हैं। माना जा रहा है कि निषाद पार्टी जितनी सीटों की अपेक्षा कर रही है, उसे लेकर भाजपा से बातचीत में मतभेद हो सकते हैं। हालांकि, संजय निषाद ने सीटों को लेकर नाराजगी की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि निषाद पार्टी आंदोलन से निकली पार्टी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी के सामने भीख मांगने वाली नहीं, बल्कि न्याय के लिए संघर्ष करने वाली पार्टी है।
माता प्रसाद पांडे से मुलाकात पर संजय निषाद की सफाई
माता प्रसाद पांडे से मुलाकात को लेकर संजय निषाद ने कहा कि केवल एक तस्वीर के आधार पर राजनीतिक मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि माता प्रसाद पांडे उनके पुराने नेता रहे हैं और छात्र जीवन में दोनों एक-दूसरे के साथी रहे हैं। संजय निषाद के मुताबिक, माता प्रसाद पांडे की तबीयत खराब थी, इसलिए उनसे मिलने जाना उनका कर्तव्य था। उन्होंने यह भी कहा कि दो बड़े नेता जब एक जगह बैठते हैं तो स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और दूसरे विषयों पर बातचीत भी होती है।
‘सपा ने दरवाजा बंद किया था, इसलिए भाजपा के साथ गया’
भाजपा के साथ अपने राजनीतिक रिश्तों को लेकर संजय निषाद ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी ने उनके लिए दरवाजा बंद कर दिया था, तब वह भाजपा के साथ गए थे। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा दरवाजा बंद करेगी तो वह आगे की राह पर विचार करेंगे। उन्होंने मछुआरा समाज को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र दिलाने की मांग भी दोहराई। संजय निषाद का कहना है कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री की ओर से पत्र लिखा गया है और केंद्रीय गृह मंत्री ने भारत के महापंजीयक कार्यालय से मामले को देखने को कहा है। उनका कहना है कि मछुआरा समाज को अनुसूचित जाति का लाभ दिलाने की मांग लंबे समय से चल रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर कोई रास्ता निकलना चाहिए।
मछुआरों के आरक्षण को लेकर मुखर हैं संजय निषाद
संजय निषाद लंबे समय से उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल करने और आरक्षण की मांग उठाते रहे हैं। वह कई मौकों पर इस मुद्दे को लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि मछुआरा समाज को सामाजिक न्याय दिलाना उनकी प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी मुद्दे को लेकर वह भाजपा नेतृत्व के सामने भी अपनी मांग रखते रहे हैं। वहीं, विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच संजय निषाद की माता प्रसाद पांडे से मुलाकात और भाजपा को लेकर दिया गया बयान आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है। फिलहाल संजय निषाद ने भाजपा से अलग होने की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके बयान ने गठबंधन की राजनीति को लेकर अटकलें जरूर तेज कर दी हैं।
