बरेली : यूपी के बरेली शहर के सीबीगंज थाना क्षेत्र में एक जनसेवा केंद्र की आड़ में चल रहे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। खुद को भाजपा का नेता बताने वाला मुकेश देवल और उसका भाई दीपक देवल लंबे समय से नकली दस्तावेज़ बनाने का गोरखधंधा चला रहे थे। बुधवार को सेना की इंटेलिजेंस यूनिट, एसओजी और सीबीगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने उनके केंद्र पर छापा मारकर इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया।
जनसेवा केंद्र की आड़ में बन रहे थे फर्जी दस्तावेज़
छापेमारी सीबीगंज क्षेत्र के महेशपुर गांव में की गई, जहां देवल बंधु अपने मकान में जनसेवा केंद्र चला रहे थे। इस केंद्र पर फर्जी आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट, ड्राइविंग लाइसेंस, रेलवे और सेना भर्ती के लिए आईडी कार्ड तैयार किए जा रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, ये दस्तावेज़ सेना में अग्निवीर भर्ती और रेलवे जैसी सरकारी सेवाओं में प्रस्तुत किए जा रहे थे। जिससे देश की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।
छापे में मिला आपत्तिजनक सामान
संयुक्त टीम की कार्रवाई के दौरान पुलिस को मौके से निम्न सामग्री बरामद हुई। इसमें दो लैपटॉप, 50 से अधिक फर्जी आधार और आयुष्मान कार्ड, फर्जी मार्कशीट और ड्राइविंग लाइसेंस, रेलवे अधिकारियों और पार्षदों की नकली मोहरें समेत अन्य सरकारी दस्तावेजों के नमूने मिले।हालांकि, छापे के समय दोनों आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
भाजपा से कोई संबंध नहीं: सीबीगंज मंडल अध्यक्ष
आरोपी मुकेश देवल ने खुद को भाजपा सीबीगंज मंडल का महामंत्री बताकर अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर राजनीतिक पहचान बना रखी थी। लेकिन भाजपा सीबीगंज मंडल अध्यक्ष अजय मौर्य ने स्पष्ट किया कि मुकेश का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है कि “मुकेश भाजपा का कोई अधिकृत पदाधिकारी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह पार्टी से जुड़ा हुआ है।
फर्जीवाड़ा कई जगहों तक फैला होने की आशंका
सेना इंटेलिजेंस द्वारा दी गई सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि देवल बंधु सिर्फ अपने घर पर ही नहीं, बल्कि बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक जैसे स्थानों पर भी आधार पंजीकरण का कार्य कर रहे थे। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क के तार अन्य जिलों और संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं। सीबीगंज पुलिस ने इस पूरे फर्जीवाड़े पर मामला दर्ज कर लिया है। आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी, सरकारी दस्तावेजों की कूटरचना और आईटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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