दिल्ली-मुंबई समेत सात प्रमुख रेल गलियारों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी, तीन परियोजनाओं से 656 किलोमीटर नेटवर्क बढ़ेगा और 14 जिलों के 4,790 गांवों को फायदा मिलेगा
नई दिल्ली: केंद्र सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद रेलवे से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों से रेलवे के व्यापक बदलाव और आधुनिकीकरण का काम जारी है। इसी क्रम में सात हाई-डेंसिटी रेल गलियारों को चार लाइन वाला बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन प्रमुख रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाना और भविष्य में बढ़ने वाले यातायात के दबाव को संभालना है।
सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की बढ़ेगी क्षमता
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, रेलवे के सात प्रमुख हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को चार लाइन करने की योजना है। इसमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली मार्ग शामिल हैं, जो मिलकर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल बनाते हैं। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता मार्ग को इसके दो विकर्ण के रूप में शामिल किया गया है। सातवें गलियारे के तौर पर दिल्ली-गुवाहाटी मार्ग भी इस योजना का हिस्सा है। इन सभी मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल करीब चार हजार किलोमीटर के हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को 10,783 करोड़ की मंजूरी
मंत्रिमंडल की समिति ने रेलवे मंत्रालय की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है। सरकार के मुताबिक, परियोजनाएं पूरी होने के बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। अतिरिक्त रेल लाइन बनने से इन मार्गों की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
किन रेल मार्गों पर होगा निर्माण
स्वीकृत परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा रेलखंड के बीच चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इसके अलावा कटनी-पेंड्रा रोड रेलखंड में भी चौथी लाइन बनाई जाएगी। बिलासपुर के उसलापुर-पेंड्रा रोड रेलखंड में तीसरी लाइन का निर्माण किया जाएगा। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से रेल परिचालन की दक्षता बढ़ेगी और सेवा की विश्वसनीयता में सुधार होगा। मल्टी-ट्रैकिंग से भीड़भाड़ कम करने के साथ माल और यात्री ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पांच राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा फायदा
तीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद करीब 4,790 गांवों की रेल संपर्क सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन गांवों में लगभग 56 लाख लोग रहते हैं। रेल नेटवर्क मजबूत होने से इन क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही और वस्तुओं के परिवहन को भी गति मिल सकती है।
पीएम गति शक्ति के तहत आगे बढ़ेगा काम
इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है। इसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना और माल परिवहन तथा आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार के अनुसार, एकीकृत योजना और संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श के आधार पर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतर संपर्क व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
रेल परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की संपर्क सुविधा मजबूत होने की उम्मीद है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार बाघ अभयारण्य, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर समेत कई प्रमुख स्थान शामिल हैं। बेहतर रेल संपर्क से इन क्षेत्रों में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी
सरकार के अनुसार, ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिए बेहद अहम हैं। अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। अनुमान के मुताबिक, इन मार्गों पर करीब 27 लाख टन नहीं बल्कि 2.7 करोड़ टन सालाना अतिरिक्त माल यातायात की संभावना है। इससे माल ढुलाई को अधिक सुचारु बनाने और प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों तक परिवहन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण और परिवहन लागत पर भी असर
सरकार ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय लाभों पर भी जोर दिया है। रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम बताते हुए कहा गया कि रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही माल परिवहन का अधिक हिस्सा रेलवे की ओर आने से परिवहन और रसद लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि रेलवे आधुनिकीकरण की ये परियोजनाएं देश की परिवहन व्यवस्था को अधिक सक्षम, तेज और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
