विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा का बड़ा फैसला, आयोग में आठ सदस्यों की भी नियुक्ति; अल्पसंख्यक मामलों में रजा की भूमिका होगी अहम
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने पूर्व मंत्री मोहसिन रजा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अध्यक्ष पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिलेगा। आयोग में उनके साथ आठ सदस्यों की नियुक्ति की गई है। मोहसिन रजा लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं और योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज विभाग में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी नई नियुक्ति को अल्पसंख्यक समाज के बीच सरकार और संगठन की पहुंच मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
योगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं मोहसिन रजा
वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के गठन के बाद मोहसिन रजा को मंत्रिमंडल में जगह मिली थी। वह विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। अब राज्य अल्पसंख्यक आयोग की कमान मिलने के बाद उन्हें एक बार फिर अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान की जिम्मेदारी मिली है। रजा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश में वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
वक्फ संपत्तियों को लेकर मुख्यमंत्री से कर चुके हैं मुलाकात
अल्पसंख्यक आयोग की नई जिम्मेदारी मिलने से कुछ समय पहले 12 अगस्त को मोहसिन रजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के दोनों वक्फ बोर्डों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। रजा ने वक्फ संपत्तियों की जिला स्तर पर विशेष जांच और विशेष लेखा परीक्षण कराने की मांग की थी। ऐसे में आयोग की जिम्मेदारी मिलने के बाद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आयोग में आठ सदस्य भी नियुक्त

सरकार की ओर से जारी नियुक्तियों के अनुसार अल्पसंख्यक आयोग में आठ सदस्यों को भी जिम्मेदारी दी गई है। इनमें संदीप जैन, अंशुमान कुमार सिंह मैसी, हनप्रीत सिंह बेदी, मोहम्मद असलम, परविंदर सिंह, नेहा खान, सैयद सिराज अब्बास रिजवी और रूमाना सिद्दीकी शामिल हैं।
लखनऊ से दो लोगों को मिली जिम्मेदारी
नियुक्त किए गए सदस्यों में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के लोगों को शामिल किया गया है। संदीप जैन एटा से, अंशुमान कुमार सिंह मैसी शाहजहांपुर से, हनप्रीत सिंह बेदी मुजफ्फरनगर से, मोहम्मद असलम फतेहपुर से, परविंदर सिंह लखनऊ से, नेहा खान अंबेडकरनगर से, सैयद सिराज अब्बास रिजवी आजमगढ़ से और रूमाना सिद्दीकी लखनऊ से हैं। इस तरह लखनऊ से दो लोगों को आयोग में सदस्य के तौर पर जगह मिली है।
2027 के चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति पर नजर
मोहसिन रजा को कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। भाजपा के सामने अल्पसंख्यक समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में अल्पसंख्यक मामलों में अनुभव रखने वाले मोहसिन रजा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिया जाना पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अल्पसंख्यक मामलों में बढ़ सकती है आयोग की सक्रियता
आने वाले समय में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं और समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर राज्य अल्पसंख्यक आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। मोहसिन रजा की नियुक्ति के बाद आयोग को एक सक्रिय राजनीतिक चेहरा मिला है। अब देखना होगा कि नई टीम के साथ आयोग अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों और सरकार की योजनाओं के बीच किस तरह समन्वय स्थापित करता है।
