नीति आयोग की रिपोर्ट में 15-29 वर्ष के करीब 8.7 करोड़ युवाओं के शिक्षा, रोजगार या ट्रेनिंग से बाहर होने का आंकड़ा आया सामने,पूर्व सांसद एवं समाजवादी चिंतक ने कविता के जरिए व्यवस्था पर उठाए सवाल
लखनऊ/नई दिल्ली : देश में युवाओं की शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को लेकर नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के आंकड़े चर्चा में हैं। ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ नाम से जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में थे, यानी वे शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से जुड़े नहीं थे। इसी आंकड़े को लेकर देश के जाने-माने कवि, पूर्व सांसद एवं समाजवादी चिंतक डॉ. उदय प्रताप सिंह की एक कविता भी चर्चा में है। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लिखा-“भोजन को मोहताज हैं, सौ में सत्तर लोग डींग मारने के लिए बना, नीति आयोग” कवि की इन पंक्तियों में बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और सरकारी नीतियों को लेकर तीखा व्यंग्य नजर आता है।कविता के जरिए उन्होंने उस सामाजिक चिंता को स्वर देने की कोशिश की है, जिसमें बड़ी युवा आबादी के शिक्षा और रोजगार से दूर रहने के सवाल पर बहस हो रही है।
क्या कहती है नीति आयोग की रिपोर्ट?
नीति आयोग की रिपोर्ट में 15 से 29 वर्ष के युवाओं को NEET यानी Not in Education, Employment or Training श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार यह समूह केवल बेरोजगार युवाओं तक सीमित नहीं है। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो घरेलू जिम्मेदारियों, स्वैच्छिक काम, स्वास्थ्य संबंधी कारणों, अवकाश या अन्य कारणों से शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण में शामिल नहीं हैं। यानी 8.7 करोड़ का आंकड़ा सीधे-सीधे बेरोजगार युवाओं की संख्या नहीं है। केंद्र सरकार ने भी इस बात को स्पष्ट करते हुए कहा है कि NEET आंकड़े को बेरोजगारी के आंकड़े के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक रिपोर्ट में इस्तेमाल डेटा NSS के 78वें दौर का है, जिसे 2020-21 के कोविड काल में एकत्र किया गया था।
युवा शक्ति के सामने शिक्षा से रोजगार तक की चुनौती
रिपोर्ट में शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद अंतर, कौशल विकास की जरूरत और युवाओं को रोजगार योग्य बनाने की चुनौती पर जोर दिया गया है।नीति आयोग ने स्किलिंग सिस्टम में बदलाव, अप्रेंटिसशिप बढ़ाने और शिक्षा को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने जैसे उपायों की जरूरत बताई है। यही वजह है कि 8.7 करोड़ NEET युवाओं का आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि देश की युवा आबादी के सामने मौजूद शिक्षा, कौशल, रोजगार और अवसरों की चुनौती को लेकर बड़ी बहस का विषय बन गया है।
कविता ने आंकड़े को दिया सामाजिक सवाल का रूप
नीति आयोग का आंकड़ा जहां नीतिगत बहस को जन्म दे रहा है, वहीं डॉ. उदय प्रताप सिंह की कविता ने इसे सामाजिक और राजनीतिक विमर्श से जोड़ दिया है। उनकी पंक्तियां सरकार और व्यवस्था से यह सवाल करती दिखाई देती हैं कि जब देश की सबसे बड़ी ताकत युवा आबादी है, तो उसके लिए शिक्षा, कौशल और सम्मानजनक रोजगार के पर्याप्त अवसर कैसे सुनिश्चित किए जाएं। हालांकि, रिपोर्ट के आंकड़ों को ‘बेरोजगार युवाओं की संख्या’ बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। क्योंकि NEET श्रेणी में बेरोजगारों के अलावा कई अन्य समूह भी शामिल हैं।
दो बार सांसद, और एक बार रहे राज्यसभा के सदस्य
देश के वरिष्ठ कवि एवं पूर्व सांसद डॉ. उदय प्रताप सिंह का जन्म 18 मई,1932 को मैनपुरी में हुआ था। हिंदी-उर्दू के वरिष्ठ कवि और साहित्यकार हैं। वे 9वीं और 10वीं लोकसभा के सदस्य रहे और 2002 से 2008 तक राज्यसभा सांसद भी रहे। उनकी कविताओं में देश, समाज और मानवीय संवेदनाओं के साथ सामाजिक सरोकार प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनकी चर्चित रचनाओं में “नहीं जी रहे अगर देश के लिए… अपराधी हो” भी शामिल है।
