कुल शरीफ के बाद घर वापसी तेज, 95फीसद से अधिक जायरीन रवाना, दरगाह पर आखिरी सलामी और दुआओं का सिलसिला जारी
बरेली : 108वें उर्स-ए-रज़वी के समापन के साथ ही देश-विदेश से आए लाखों जायरीन की घर वापसी का सिलसिला तेज हो गया। कुल शरीफ के बाद बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह आला हज़रत पर आखिरी सलामी पेश कर नम आंखों से अपने-अपने शहरों और देशों के लिए रवाना हुए। रुख़्सत होते समय हर ज़ायरीन की ज़ुबान पर यही दुआ थी कि “अगर ज़िंदगी रही तो अगले साल फिर उर्स-ए-रज़वी में हाज़िरी ज़रूर देंगे।”
दुनिया भर से आए थे जायरीन
दरगाह आला हज़रत पर आयोजित 108वें उर्स-ए-रज़वी में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। कुल शरीफ के बाद रविवार को भी जायरीन की वापसी का सिलसिला जारी रहा। रवाना होने से पहले जायरीन ने दरगाह प्रमुख हज़रत सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन मियां से मुलाकात कर दुआ और इजाज़त ली। दरगाह प्रशासन के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत जायरीन अपने गंतव्य के लिए रवाना हो चुके हैं, जबकि शेष अकीदतमंद कुल शरीफ की रस्म में शामिल होने के बाद वापस लौटेंगे। दरगाह परिसर में कुल शरीफ की रस्म दोपहर 2:38 बजे अदा की गई।
इस्लामी माह 25 सफ़र को उर्स -ए-रज़वी
आला हज़रत का उर्स हर वर्ष इस्लामी माह 25 सफ़र को मनाया जाता है। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि उर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने सिलसिला -ए-आलिया कादरिया रज़विया के बुजुर्गों हज़रत सुब्हानी मियां और मुफ़्ती अहसन मियां के हाथ पर बैअत (मुरीद) होकर रूहानी रिश्ते को मजबूत किया। उधर, उर्स के अमन, भाईचारे और कामयाबी के साथ संपन्न होने पर तहरीक तहफ़्फुज़-ए-सुन्नियत (टीटीएस) के कार्यकर्ताओं ने सैय्यद आसिफ मियां के नेतृत्व में दरगाह पर गुलपोशी और फ़ातिहाख्वानी कर मुल्क में अमन, खुशहाली और इंसानियत की बेहतरी के लिए दुआ की।
गुलपोशी में ये थे मौजूद
उर्स -ए-रज़वी में राशिद अली खान, अजमल नूरी, शाहिद नूरी, परवेज़ नूरी, औरंगज़ेब नूरी, नासिर कुरैशी, ताहिर अल्वी, सैय्यद फैज़ान अली, मंजूर रज़ा, मुजाहिद बेग, इशरत नूरी, नफीस खान, शान रज़ा, तारिक सईद, हाजी शारिक नूरी, युनुस गद्दी, इरशाद रज़ा, आसिफ रज़ा, ग़ज़ाली रज़ा, जुहैब रज़ा,काशिफ रज़ा, सैय्यद एजाज़, सैय्यद माजिद, काशिफ सुब्हानी, गौहर खान, नईम नूरी, हाजी अब्बास, हाजी अज़हर बेग, फारूक खान, शारिक बरकाती, मोहसिन रज़ा, ज़ुबैर रज़ा, सबलू अल्वी, फ़ैज़ कुरैशी, यूनुस साबरी, सुहैल रज़ा, शाद रज़ा, ज़ीशान रज़ा, सऊद रज़ा, रोमान खान,हाजी फ़य्याज़, आदिल रज़ा, अरबाज़ रज़ा, साकिब रज़ा, मिर्ज़ा जुनैद, जुनैद रज़ा चिश्ती, आसिम नूरी, साजिद नूरी, मुस्तक़ीम नूरी, रेहान कुरैशी, अश्मीर रज़ा, फ़ैज़ी रज़ा, अजमल रज़ा, समी खान,आरिफ नूरी, जावेद खान, हस्सान रज़ा, मुल्तज़म, हसन बरेलवी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
