छात्रों से संवाद में बोले राहुल गांधी- पढ़ाई के बाद भी पेपर लीक से युवाओं की मेहनत बर्बाद, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की उठी मांग
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद किया। इस दौरान सरकारी नौकरी, बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक के मुद्दे पर उन्होंने सरकार को घेरा। कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी समस्याएं राहुल गांधी के सामने रखीं और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी बोले- 1000 में सिर्फ 12 युवाओं को नौकरी
राहुल गांधी ने कहा कि 1000 युवाओं में से केवल 12 युवाओं को नौकरी मिलती है। उन्होंने युवाओं के आंकड़ों और निजी जानकारी के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। रील और वीडियो बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर राहुल गांधी ने कहा कि यह 21वीं सदी का एक तरह का नशा है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे केवल रील और वीडियो बनाने में समय न गंवाएं, क्योंकि इससे उन्हें रोजगार नहीं मिलेगा। उन्होंने ब्लिंकिट जैसी कंपनियों में काम करने वाले युवाओं का उदाहरण भी दिया। मंच पर एक युवा का वीडियो दिखाया गया, जिसमें वह बता रहा था कि वह दिन में करीब 10 घंटे काम करने के बाद पढ़ाई करता है, लेकिन परीक्षा में पेपर लीक होने पर उसकी मेहनत बेकार हो जाती है।
‘अमीर पर्चा खरीदकर गरीबों की मेहनत बर्बाद कर देता है’
राहुल गांधी ने कहा कि एक युवा पूरी मेहनत से परीक्षा की तैयारी करता है, लेकिन कोई अमीर व्यक्ति पर्चा खरीदकर उसकी मेहनत पर पानी फेर देता है। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने दो छात्रों को मंच पर बुलाकर उनसे सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
छात्र ने भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का लगाया आरोप
एक छात्र ने राहुल गांधी को बताया कि उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती कई वर्षों बाद हुई, लेकिन इसमें कथित फर्जीवाड़े के आरोप लगे। छात्र ने दावा किया कि भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों के स्कोर कार्ड जारी नहीं किए जाते, जिससे उन्हें अपने वास्तविक अंक और चयन प्रक्रिया की जानकारी नहीं मिल पाती। छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी समस्या को लेकर उसने जनता दरबार और कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की, लेकिन इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। छात्र ने कहा कि सामान्यीकरण की प्रक्रिया भी पेपर लीक से बड़ा मुद्दा है। उसने भर्ती परीक्षाओं का नियमित कैलेंडर जारी करने और समय पर परिणाम घोषित करने की मांग की।
‘2018 से भर्ती की तैयारी कर रहे हैं’
एक छात्र ने बताया कि उसने 2018 में शिक्षक भर्ती की तैयारी शुरू की थी और आज तक तैयारी कर रहा है। उसके मुताबिक, प्रदेश में कई बार धरना-प्रदर्शन किए गए, लेकिन भर्ती प्रक्रिया को लेकर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों ने मांग की कि सरकार सभी रिक्त पदों का भर्ती कैलेंडर जारी करे, ताकि अभ्यर्थियों को परीक्षा और परिणाम की समयसीमा की जानकारी मिल सके।
छात्र ने गिनाईं पेपर लीक की घटनाएं
पेपर लीक के अनुभव को लेकर जब राहुल गांधी ने छात्र से सवाल किया कि परीक्षा की तैयारी करने के बाद पेपर लीक होने पर कैसा महसूस होता है, तो छात्र ने कहा कि 10 बाई 10 के कमरे में बैठकर तैयारी करने वाले युवा ही उस दर्द को समझ सकते हैं। छात्र ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उसने वर्ष 2017 की दरोगा भर्ती, 2018 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती और 2022 की लेखपाल भर्ती समेत कई परीक्षाओं का जिक्र किया।
रोजगार के रास्ते बंद होने का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि युवा पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन रोजगार के रास्ते लगातार बंद होते जा रहे हैं। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों में बड़े पैमाने पर विनिर्माण दिखाई देता है, जबकि भारत पीछे रह गया है। उन्होंने नोटबंदी जैसी नीतियों को भी छोटे कारोबार और विनिर्माण क्षेत्र पर असर डालने वाला बताया।
सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों को लेकर सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने कहा कि करीब 10 साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र में लाखों युवाओं को रोजगार मिलता था, लेकिन अब सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र को बेच दिया और इससे रोजगार के अवसर प्रभावित हुए। उन्होंने निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसरों को लेकर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल से आने वाले समय में रोजगार के कुछ और रास्ते भी प्रभावित हो सकते हैं।
छात्रों की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। पेपर लीक, भर्ती में देरी, सामान्यीकरण, सरकारी नौकरियों की कमी और रोजगार के अवसरों जैसे मुद्दों को उन्होंने प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ने युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की।
