लखनऊ/गाजियाबाद : यूपी के गाजियाबाद जिले में कानून-व्यवस्था को चुनौती देती एक बड़ी घटना सामने आई है। मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में वांछित अपराधी को पकड़ने गई नोएडा पुलिस टीम पर भीड़ ने पथराव और फायरिंग कर दी। इस हिंसक हमले में कांस्टेबल सौरभ देशवाल को गोली लग गई। जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई, तो वहीं, 2 से 3 अन्य पुलिसकर्मी घायल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, नोएडा फेज-3 थाना और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम रविवार देर रात मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में वांछित आरोपी कादिर उर्फ मंटर को पकड़ने पहुंची थी, जैसे ही टीम ने गांव में दबिश दी, तभी वहां मौजूद कादिर के परिजनों और कुछ ग्रामीणों ने अचानक पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव के साथ-साथ हमलावरों ने फायरिंग भी की। इसी दौरान सिपाही सौरभ देशवाल के सिर में गोली लगी और वे मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस टीम ने उन्हें तत्काल यशोदा अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घायल पुलिसकर्मियों का इलाज जारी
पथराव में 2 से 3 अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, घायल कर्मियों की पहचान और स्थिति के बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है।
मूल रूप से शामली के निवासी थे सौरभ

शहीद कांस्टेबल सौरभ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रहने वाले थे और वर्तमान में नोएडा के थाना फेस-3 में तैनात थे। वे अपने कर्तव्य के प्रति बेहद समर्पित माने जाते थे। उनकी शहादत से पुलिस महकमे में गहरा शोक है।
आरोपी गिरफ्तार, FIR दर्ज
डीसीपी ग्रामीण सुरेन्द्र नाथ तिवारी ने बताया कि घटना के दौरान भागने की कोशिश कर रहे कादिर को पुलिस ने मौके से ही पकड़ लिया। मामले में थाना मसूरी में FIR दर्ज की गई है और हमले में शामिल अन्य लोगों की पहचान के प्रयास जारी हैं। पुलिस का कहना है कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
गांव में तनाव, भारी पुलिस बल तैनात
पुलिस टीम पर हुए हमले और एक जवान की मौत के बाद पूरे नाहल गांव में भारी तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर गांव में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। पुलिस ड्रोन और CCTV फुटेज की मदद से हमलावरों की पहचान में जुटी है।
शहीद सौरभ को श्रद्धांजलि, परिवार को न्याय की मांग
कांस्टेबल सौरभ देशवाल ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए जान गंवाई है। यह बलिदान व्यर्थ न जाए इसके लिए सरकार से मांग की जा रही है कि उनके परिवार को शहीद का दर्जा, उचित मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
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