बरेली : फाज़िले बरेलवी इमाम अहमद रज़ा ख़ान (आला हज़रत) के 108वें उर्स-ए-रज़वी का गुरुवार रात रज़वी परचम की कुशाई के साथ भव्य आगाज़ हो गया। लगातार हो रही रिमझिम बारिश के बावजूद अकीदतमंदों का जोश कम नहीं हुआ और दरगाह आला हज़रत से लेकर इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान तक पूरा इलाका रूहानी माहौल में डूबा नजर आया। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में जायरीन बरेली पहुंच रहे हैं।बारिश के कारण आज़म नगर से सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की कयादत में निकलने वाला मुख्य परचमी जुलूस निर्धारित समय से कुछ देर बाद रवाना हुआ। इसके अलावा ठिरिया निजावत ख़ां और रहपुरा चौधरी से भी परचम और चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचे।परंपरागत मार्गों से गुजरते हुए जुलूस का जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। कई स्थानों पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर इस्तकबाल किया, जो गंगा -जमुनी तहज़ीब की मिसाल बना।
रात 9:20 बजे अदा हुई परचम कुशाई की रस्म
ईशा की नमाज़ के बाद इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान स्थित रज़ा गेट पर दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा ख़ान (सुब्हानी मियां) ने सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन मियां, सैय्यद आसिफ मियां तथा देश-विदेश से आए उलेमा की मौजूदगी में रात 9:20 बजे रज़वी परचम लहराकर परचम कुशाई की रस्म अदा की। इसके साथ ही तीन दिवसीय 108वें उर्स-ए-रज़वी का विधिवत शुभारंभ हो गया।फातिहा के बाद मुफ़्ती सलीम नूरी ने विशेष दुआ कराई और पूरा परिसर “नारे-ए-तकबीर” और “मसलक-ए-आला हज़रत ज़िंदाबाद” के नारों से गूंज उठा।
अमन, भाईचारे और जिम्मेदारी सोशल मीडिया इस्तेमाल का संदेश
इस मौके पर दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा ख़ान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी ने जायरीन से दीन पर मजबूती से कायम रहने, आपसी भाईचारा बढ़ाने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की अपील की। दोनों उलेमा ने कहा कि आला हज़रत की तालीमात अमन, मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का पैगाम देती हैं, जिसे समाज में आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।
देर रात तक चला नातिया मुशायरा और धार्मिक कार्यक्रम
परचम कुशाई के बाद इस्लामिया मैदान और मदरसा जामियातुर्रज़ा में देर रात तक अंतरराष्ट्रीय नातिया मुशायरा, महफिल -ए- मिलाद और उलेमा की तकरीरें जारी रहीं। रात 10:35 बजे हुज्जतुल इस्लाम मुफ़्ती हामिद रज़ा ख़ान (हामिद मियां) के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।अपने बयान में मुफ़्ती सलीम नूरी ने कहा कि हुज्जतुल इस्लाम ने मुसलमानों को शिक्षा और आर्थिक मजबूती पर विशेष जोर दिया था तथा सुन्नियत की पहचान को दुनिया भर में मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
रोशनी से जगमगाई दरगाह, उमड़ रहे हैं जायरीन
उर्स के अवसर पर दरगाह आला हज़रत, मदरसा जामियातुर्रज़ा और इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। गुस्ल शरीफ के बाद दरगाह का मनमोहक दृश्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। जायरीन की सुविधा के लिए लंगर, दुआ और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, रूट डायवर्जन लागू
उर्स को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं। शहर में रूट डायवर्जन लागू किया गया है तथा भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं उर्स के मद्देनज़र शहर के करीब 10 शिक्षण संस्थानों में दो दिन का अवकाश घोषित किया गया है।
आज होंगे अहम धार्मिक कार्यक्रम
7 अगस्त (जुमा) को फज्र की नमाज़ के बाद कुरानख्वानी होगी। सुबह 9:58 बजे रेहाने मिल्लत और 10:30 बजे मुफस्सिर-ए-आज़म के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद आयोजित होने वाली मज़हब-ओ-जमालक कॉन्फ्रेंस में उलेमा नामूसे रिसालत, मिशन मसलक-ए-आला हज़रत, समाज सुधार, आपसी सौहार्द और सामाजिक बुराइयों के खात्मे जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। रात में देश-विदेश के प्रसिद्ध उलेमा की तकरीरें होंगी और देर रात 1:40 बजे मुफ़्ती-ए-आज़म-ए-हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी।
8 अगस्त को दोपहर 2:38 बजे
कुल शरीफ की रस्म के साथ 108वें उर्स-ए-रज़वी का समापन होगा। इस वर्ष भी लाखों जायरीन के उर्स में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
