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रांची, झारखंड: राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए घोषणा की है कि झारखंड के प्रत्येक जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर एक विशाल पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी। यह घोषणा खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बाबा साहेब के विचारों और संविधान निर्माण में उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
सामाजिक न्याय और शिक्षा को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह पुस्तकालय न सिर्फ अध्ययन का केंद्र होगा, बल्कि युवाओं के लिए शैक्षणिक और सामाजिक चेतना का सशक्त मंच भी बनेगा। अंबेडकर जी की शिक्षाएं, विचारधारा, उनके द्वारा लिखित ग्रंथ और संविधान से जुड़े दस्तावेज इन पुस्तकालयों में उपलब्ध होंगे।
डॉ. अंबेडकर के विचारों को जीवित रखने की पहल
डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान की रचना में अग्रणी भूमिका निभाई थी और हमेशा शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के पक्षधर रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी शिक्षाओं को केवल किताबों तक सीमित न रखकर, उन्हें समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।
पुस्तकालयों में आधुनिक सुविधाएं होंगी उपलब्ध
इन पुस्तकालयों में डिजिटल रीडिंग रूम, इंटरनेट सुविधाएं, ई-लाइब्रेरी, ऑडियो-विजुअल सेक्शन, और शोध छात्रों के लिए विशेष अध्ययन केंद्र बनाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि ये केंद्र युवाओं को अंबेडकर के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से परिचित कराएं।
झारखंड की नई पीढ़ी को मिलेगा दिशा-निर्देश
सीएमहेमंत सोरेन ने कहा कि इस पहल से झारखंड की नई पीढ़ी न केवल डॉ. अंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेगी, बल्कि अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होगी। यह पुस्तकालय आने वाले समय में सामाजिक परिवर्तन का वाहक बनेंगे।
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