लोकसभा में सरकार का खुलासा- कैग रिपोर्ट के आधार पर चार साल पहले सिर्फ एक सीबीआई मामला हुआ था दर्ज
नई दिल्ली/बरेली : सरकारी विभागों, केंद्रीय संस्थानों और विभिन्न योजनाओं के वित्तीय एवं प्रदर्शन ऑडिट करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्टों पर कार्रवाई को लेकर लोकसभा में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सरकार ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में कैग की रिपोर्टों के आधार पर केवल एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया और वह भी अब बंद हो चुका है। इस खुलासे के बाद कैग रिपोर्टों पर कार्रवाई और सरकारी जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
सपा सांसद नीरज मौर्य के सवाल पर सामने आई सच्चाई

लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य और सांसद सुनील बोस के प्रश्न के लिखित उत्तर में कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि कैग रिपोर्ट के आधार पर 12 जुलाई 2022 को कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले में सीबीआई ने एक केस दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद 31 मार्च 2025 को सक्षम न्यायालय में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई।
कैग पर हजारों करोड़ खर्च, कार्रवाई पर उठे सवाल
संसद में उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2026-27 के बीच कैग विभाग पर वेतन और अन्य मदों में लगभग 30,642 करोड़ रुपये का सार्वजनिक धन खर्च होने का उल्लेख किया गया। इस पृष्ठभूमि में विपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि ऑडिट रिपोर्टों के आधार पर आपराधिक कार्रवाई लगभग नहीं के बराबर है, तो वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
सरकार ने बताई मौजूदा प्रक्रिया
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि कैग की रिपोर्टों पर संबंधित मंत्रालय एक्शन टेकन नोट (ATN) तैयार करते हैं, जिनकी समीक्षा संसद की लोक लेखा समिति (PAC) करती है। इसके अलावा वित्तीय अनुशासन, आंतरिक नियंत्रण और प्रशासनिक सुधारों के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
कानून में बदलाव का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया कि कैग की सिफारिशों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने या इस संबंध में कानून में संशोधन करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे में कैग रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई की मौजूदा व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी।
