बरेली: शहर कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित एलए मॉल में रविवार रात लिफ्ट में 13 लोगों के फंसने की घटना के बाद सोमवार को मॉल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया। मॉल के जीएम ऑपरेशंस विदित ने मीडिया से बातचीत में घटना की पूरी जानकारी देते हुए कहा कि मामले की प्रारंभिक जांच जारी है और सोशल मीडिया पर चल रही कुछ बातें वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती हैं।
रात 9:30 बजे लिफ्ट में फंसे थे 13 लोग
जीएम ऑपरेशंस विदित ने बताया कि घटना रविवार रात करीब 9:30 बजे की है। मॉल प्रबंधन को सूचना मिली थी कि लिफ्ट के अंदर करीब 12 से 13 लोग फंस गए हैं।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लाइट फ्लक्चुएशन यानी बिजली के उतार-चढ़ाव के कारण लिफ्ट सिस्टम में एरर आया था। उन्होंने बताया कि अभी जांच जारी है, लेकिन संभावना यह भी है कि लिफ्ट के अंदर लगे सेंसर या बटन एक साथ दब जाने के कारण सिस्टम हैंग हो गया हो। विदित के मुताबिक कई बार लिफ्ट में खड़े लोगों के शरीर या पीठ के टच होने से भी सेंसर प्रभावित हो जाते हैं। जिससे तकनीकी समस्या पैदा हो सकती है। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर ऐसी लिफ्ट 30 सेकंड से एक मिनट के भीतर नजदीकी फ्लोर या ग्राउंड फ्लोर पर पहुंच जाती है, लेकिन इस मामले में लिफ्ट पहली मंजिल पर ही अटक गई। उनका कहना है कि घबराहट में अंदर मौजूद लोगों ने दरवाजे पर दबाव डाला होगा या उसे खोलने की कोशिश की होगी। जिससे सेंसर ने काम करना बंद कर दिया और दरवाजा नहीं खुल सका।
15 से 20 मिनट में सभी लोगों को सुरक्षित निकाला गया
विदित ने बताया कि सूचना मिलते ही मॉल की सिक्योरिटी और टेक्निकल टीम मौके पर पहुंच गई थी। उनके अनुसार करीब 15 से 20 मिनट के भीतर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू में किसी तरह की असामान्य देरी नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया मॉल की टीम ने संभाली। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों पर विदित ने कहा कि मॉल में सुरक्षा गार्डों की कोई कमी नहीं थी। उन्होंने बताया कि मॉल में कुल आठ लिफ्ट संचालित होती हैं और घटना के समय करीब 12 सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर मौजूद थे। इसलिए यह कहना गलत होगा कि मौके पर सुरक्षा कर्मी उपलब्ध नहीं थे।
बेहोश होने की बात का नहीं मिला कोई सबूत
इस घटना के बाद कुछ लोगों ने दावा किया था कि लिफ्ट में फंसा एक व्यक्ति बेहोश हो गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदित ने कहा कि मॉल प्रबंधन ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की है, लेकिन फुटेज में ऐसा कोई व्यक्ति दिखाई नहीं दिया जो बेहोश हुआ हो।उन्होंने कहा कि बंद लिफ्ट में घुटन या गर्मी के कारण किसी व्यक्ति को असहज महसूस हो सकता है, लेकिन अब तक उपलब्ध फुटेज और जानकारी में किसी के बेहोश होने की पुष्टि नहीं हुई है। मॉल प्रबंधन के अनुसार बेहोशी की खबरों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
गार्ड की अनुपस्थिति और रॉड से दरवाजा तोड़ने की बात पर भी दी सफाई
लिफ्ट के पास गार्ड मौजूद न होने के सवाल पर विदित ने कहा कि सामान्य रूप से लिफ्ट क्षेत्र में गार्ड तैनात रहते हैं। हालांकि, यह संभव है कि घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद गार्ड कुछ मिनटों के लिए किसी कारणवश, जैसे वॉशरूम आदि जाने के लिए अपनी जगह से हट गया हो। उन्होंने माना कि उस समय वहां गार्ड मौजूद नहीं रहा होगा। वहीं, कुछ लोगों द्वारा रॉड लगाकर लिफ्ट का दरवाजा तोड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि यह जानकारी गलत है। उनके मुताबिक मॉल में ऐसी कोई रॉड उपलब्ध नहीं थी और न ही किसी ने दरवाजा तोड़ा। उन्होंने कहा कि मॉल की सिक्योरिटी और 24 घंटे मौजूद रहने वाली टेक्निकल टीम ने ही रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसका रिकॉर्ड सीसीटीवी फुटेज में भी मौजूद है।
भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की तैयारी
विदित ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मॉल प्रबंधन अतिरिक्त कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया कि देर रात तक चलने वाले सिनेमा शो को देखते हुए सुरक्षा गार्डों की तैनाती का समय बढ़ाया जाएगा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कभी लिफ्ट में फंस जाएं तो घबराकर दरवाजे को धक्का देने या जोर लगाने की कोशिश न करें। उनका कहना है कि सेंसर आधारित और ऑटोमैटिक लिफ्टों में ऐसा करने से सेंसर प्रभावित हो सकते हैं और समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए ऐसी स्थिति में धैर्य बनाए रखना और सहायता का इंतजार करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
