कर्बला की जंग दहशतगर्दी के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई थी, यजीद जीतकर भी हार गया और इमाम हुसैन शहीद होकर भी जीत गए
बरेली : मुहर्रम की पांचवीं तारीख के अवसर पर दरगाह आला हज़रत के टीटीएस मुख्यालय में शहीद -ए- कर्बला हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में एक विशेष नशिस्त का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन दरगाह सरपरस्त हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती में किया गया। इसमें बड़ी संख्या में उलेमा और अकीदतमंद शामिल हुए। नशिस्त की सदारत करते हुए दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा खान कादरी (अहसन मियां) ने फज़ाइल-ए-अहल-ए-बैत और हज़रत इमाम हुसैन की शान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि करीब 1400 वर्ष पूर्व सन 680 ईस्वी में कर्बला के मैदान में जो जंग लड़ी गई थी, वह हक और बातिल के बीच की लड़ाई थी।उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश यह है कि सत्य और न्याय के लिए हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। उनके अनुसार, यजीद जंग जीतने के बावजूद इतिहास में सम्मान नहीं पा सका, जबकि हज़रत इमाम हुसैन शहादत के बाद भी पूरी दुनिया में सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किए जाते हैं।
कर्बला का संदेश आज भी प्रासंगिक
मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि कर्बला का वाकया केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सब्र, त्याग, सत्यनिष्ठा और सिद्धांतों पर अडिग रहने का पैगाम है। उन्होंने कहा कि जब ईमान, इंसाफ और सच्चाई की रक्षा का सवाल हो, तो इंसान को किसी भी कठिनाई या चुनौती से घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने अपने नाना हज़रत मोहम्मद साहब के दीन की हिफाजत के लिए अपने परिवार और साथियों के साथ सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन अन्याय और अत्याचार के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। यही कारण है कि आज भी दुनिया भर में उन्हें सम्मान और अकीदत के साथ याद किया जाता है।
इमाम हुसैन की शिक्षाओं पर अमल की अपील
मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि केवल मोहब्बत का दावा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हज़रत इमाम हुसैन की शिक्षाओं, उनके आदर्शों और उनके बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची मोहब्बत की पहचान है। उन्होंने लोगों से शरीयत की पाबंदी, सुन्नत की पैरवी और अच्छे आचरण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ
कार्यक्रम के अंत में शहीद -ए- कर्बला और बाबा फरीद गंजशकर रहमतुल्लाह अलैह की नज़र का एहतमाम किया गया। इसके बाद मुफ्ती अहसन मियां ने देश में अमन-ओ-अमान,भाईचारे और पूरी उम्मत के लिए खैर-ओ-बरकत की विशेष दुआ कराई। इस अवसर पर मौलाना ज़ाहिद रज़ा,मौलाना बशीरुल कादरी, मौलाना शहनवाज़ आलम, मोहसिन हसन खान,नासिर कुरैशी, परवेज़ नूरी, शाहिद नूरी, अजमल नूरी, औरंगज़ेब नूरी, मंज़ूर रज़ा, ताहिर अल्वी, साजिद नूरी, नईम नूरी, ज़ुहैब रज़ा, हस्सान खान, सुहैल रज़ा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
