दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने मुहर्रम में भलाई के कार्यों और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
बरेली : इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम का चांद 16 जून (मंगलवार) की शाम को देखा जाएगा। चांद दिखाई देने के साथ ही इस्लामी नए साल 1448 हिजरी का आगाज़ होगा। चांद की स्थिति के अनुसार नया हिजरी वर्ष 17 या 18 जून से शुरू होगा। यह जानकारी दरगाह आला हज़रत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने दी।उन्होंने बताया कि मुहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना है और इसी माह से हिजरी संवत की शुरुआत होती है। चांद के अनुसार यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) 26 या 27 जून को मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर में हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की जाएगी।
मुहर्रम सब्र और सच्चाई का पैगाम देता है: अहसन मियां
दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा कादरी (अहसन मियां) ने कहा कि माहे मुहर्रम मुसलमानों को सब्र, सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश यह है कि कठिन परिस्थितियों में भी हक और इंसाफ का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सन 680 ईस्वी में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अन्याय और जुल्म के सामने झुकने के बजाय शहादत को चुना और इंसानियत तथा सत्य का परचम बुलंद किया।कर्बला का मैदान आज भी बुराई के खिलाफ आवाज उठाने और सत्य के साथ खड़े रहने की सीख देता है।
भलाई के कार्यों और समाजसेवा का आह्वान
सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने लोगों से मुहर्रम के दौरान अधिक से अधिक नेक कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नमाज की पाबंदी, कुरआन की तिलावत, रोजा रखने और इमाम हुसैन की याद में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत करने के साथ गरीबों, यतीमों, विधवाओं और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने लंगर वितरण के दौरान खाने की बर्बादी रोकने पर भी जोर दिया और कहा कि लोगों को बैठाकर सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाए, ताकि रिज्क की कद्र बनी रहे।
पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
दरगाह की ओर से जारी संदेश में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया। अहसन मियां ने कहा कि पौधारोपण करना एक नेक कार्य है और यह पैगंबर -ए- इस्लाम की सुन्नत भी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, हरियाली बढ़ाने तथा पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि बीमार और जरूरतमंद लोगों की मदद करना, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना तथा समाज में अमन और भाईचारे को बढ़ावा देना ही हुसैनियत की असली पहचान है। दरगाह आला हज़रत की ओर से मुहर्रम के पवित्र महीने में शांति, सद्भाव, समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया है।
