गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल, धार्मिक एकता की अद्वितीय प्रेरणा
बरेली : धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करता है, बरेली का प्रसिद्ध ‘चुन्ने मियां का मंदिर’, जिसका निर्माण एक मुस्लिम व्यवसायी फजलुर्रहमान खां उर्फ चुन्ना मियां ने कराया था। यही नहीं, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 16 मई 1960 को इस भव्य मंदिर का उद्घाटन अपने कर-कमलों से किया था। यह मंदिर आज भी देश के लिए गंगा-जमुनी संस्कृति और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
एक प्रेरक इतिहास,ज़मीन विवाद से सेवा और श्रद्धा की मिसाल तक

भारत के विभाजन के बाद बड़ी संख्या में हिंदू शरणार्थी बरेली के कोहाड़ापीर क्षेत्र में आकर बसे। पूजा-पाठ के लिए जब उन्हें कोई स्थल नहीं मिला, तो उन्होंने चुन्ना मियां की खाली पड़ी ज़मीन पर एक छोटा सा मंदिर बना लिया। चुन्ना मियां ने इसे अवैध कब्ज़ा मानकर कोर्ट में केस दर्ज कराया। इसी दौरान हरिद्वार से आए संत हरमिलापी जी महाराज ने उन्हें समझाया कि यह मामला धार्मिक आस्था और मानवता का है। संत की बात ने चुन्ना मियां का हृदय बदल दिया। उन्होंने केस वापस लिया और स्वेच्छा से मंदिर निर्माण का बीड़ा उठाया।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने किया उद्घाटन

मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद 16 मई 1960 यानी आज से 65 साल पहले भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मंदिर का उद्घाटन किया। यह अवसर बरेली के इतिहास में धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे की भावना का स्वर्णिम दिन माना जाता है।
20700 रुपये का दान और श्रमदान भी किया
चुन्ना मियां ने मंदिर निर्माण के लिए 20700 रुपये का आर्थिक सहयोग दिया, जो उस समय एक बड़ी राशि मानी जाती थी। इसके अलावा उन्होंने खुद निर्माण कार्य में श्रमदान किया। उन्होंने मंदिर संचालन के लिए ‘सनातन धर्म सभा’ का पंजीकरण कराया। जिससे यह स्थल एक स्थायी धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ।
अद्वितीय वास्तुशिल्पअशोक स्तंभ से सजा प्रवेश द्वार
मंदिर का मुख्य द्वार अशोक की लाट (Ashokan Pillar) से सजाया गया है, जो भारतीय संविधान, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। देशभर के मंदिरों में यह एक दुर्लभ विशेषता मानी जाती है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान लक्ष्मीनारायण की भव्य मूर्तियाँ विराजमान हैं। यह मंदिर हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए खुला है, जो इसकी समावेशी सोच को दर्शाता है।
भाईचारे की मिसाल बनकर आज भी प्रेरणा दे रहा है मंदिर
आज जब देश कई बार धार्मिक विभाजन और कट्टरता की घटनाओं से जूझता है, ऐसे समय में चुन्ने मियां का मंदिर एक प्रेरणास्त्रोत है, जो बताता है कि धर्म का असली उद्देश्य सेवा, प्रेम और एकता है। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, विविधता में एकता और मानवीय मूल्यों का प्रतीक
