बरेली: एक बेहद संवेदनशील और लंबे समय तक चले मामले में आखिरकार इंसाफ मिल ही गया।करीब 16 साल पुराने नाबालिग अपहरण और दुष्कर्म के दो जुड़े मामलों में विशेष एससी/एसटी कोर्ट बरेली ने मुख्य आरोपी समेत कई लोगों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। यह फैसला पीड़िता और उसके परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
स्कूल से लौटते वक्त हुई थी वारदात
पूरा मामला मीरगंज थाना क्षेत्र का है। 28 दिसंबर 2010 को 12 साल की एक नाबालिग छात्रा, जो कक्षा 8 में पढ़ती थी, परीक्षा देने स्कूल गई थी, लेकिन घर वापस नहीं लौटी। परिजनों की तलाश के दौरान गांव के लोगों ने बताया कि ओमकार नाम का युवक उसे साइकिल पर बैठाकर ले गया था।
बहला-फुसलाकर ले गया, घर में बंद कर किया अपराध
शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जांच में सामने आया कि आरोपी ओमकार बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसे रामप्रसाद के घर में बंद करके रखा, जहां उसके साथ गलत काम किया गया। पुलिस ने बच्ची को बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जमानत पर छूटकर फिर किया अपहरण
जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने पीड़िता और उसके परिवार पर समझौते का दबाव बनाना शुरू कर दिया। 15 दिसंबर 2011 को जब पीड़िता अपने पिता के साथ कोर्ट जा रही थी, तभी आरोपी अपने भाई चंद्रपाल, पिता बुद्धीलाल और मां विमला देवी के साथ पहुंचा और उसे जबरन छीनकर ले गया। इसके बाद उसके साथ फिर से उसके साथ गलत काम किया गया।
कोर्ट में गवाही के बाद आया फैसला
दोनों मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और अभियोजन पक्ष ने 7-7 गवाह पेश किए। लंबी सुनवाई के बाद 29 अप्रैल 2026 को विशेष एससी/एसटी कोर्ट बरेली ने अपना फैसला सुनाया और मुख्य आरोपी ओमकार को दोनों मामलों में दोषी करार दिया।
आरोपियों को मिली ये सजा
अदालत ने पहले मामले में ओमकार को धारा 363 और 368 में 3 साल की सजा व 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 366 में 5 साल की सजा व 10 हजार रुपये जुर्माना, और धारा 376 में 10 साल की सजा व 20 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। दूसरे मामले में भी ओमकार को धारा 363 में 3 साल, धारा 366 में 5 साल और धारा 376 में 10 साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, भाई चंद्रपाल, पिता बुद्धीलाल और मां विमला देवी को धारा 363 के तहत 3-3 साल का कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना दिया गया है। वहीं, पहले मामले में रामप्रसाद को धारा 368 के तहत 3 साल की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया है।
