पोस्ट विवाद से शुरू हुआ मामला अब कई छात्र संगठनों की एंट्री से गरमाया, प्राचार्य का घेराव, कार्रवाई की मांग तेज
बरेली : बरेली कॉलेज,बरेली में चीफ प्राक्टर और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई धक्का-मुक्की का मामला अब और ज्यादा सियासी और छात्र संगठनों के टकराव में बदलता जा रहा है। गुरुवार को समाजवादी छात्र सभा (सछास) के कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा खोलते हुए कॉलेज परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे, और प्राचार्य कार्यालय का घेराव किया। छात्रों ने मांग की।कि शिक्षकों के साथ अभद्रता करने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन के साथ बढ़ा दबाव

सछास कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि कॉलेज में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। शिक्षकों का अपमान करने वालों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। इससे पहले छात्र नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने सीओ प्रथम आशुतोष शिवम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
जानें क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला 19 मार्च को नवरात्र के पहले दिन की एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ। चीफ प्राक्टर प्रो. आलोक खरे पर आरोप है कि उन्होंने एक पोस्ट में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिससे एबीवीपी कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। इसके विरोध में एबीवीपी ने कॉलेज में प्रदर्शन किया। यह मामला बढ़कर नोकझोंक और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।
प्राक्टर का आरोप vs छात्रों का विरोध
प्रो. आलोक खरे का आरोप है कि छात्रों और बाहरी तत्वों ने गाली -गलौज और धक्का-मुक्की की। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी दी गई। वहीं, छात्र संगठनों का कहना है कि पोस्ट नारी और धार्मिक भावनाओं का अपमान थी।जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी उम्मीद नहीं थी।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
प्राचार्य प्रो. ओपी राय द्वारा हंगामे के बीच चीफ प्राक्टर को हटाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि प्रो. खरे पहले ही इस्तीफा दे चुके थे। इसके बावजूद औपचारिक हटाने की प्रक्रिया विवाद के दौरान पूरी की गई।
छात्र राजनीति में बढ़ा टकराव
अब इस विवाद में ABVP और समाजवादी छात्र सभा (सछास) दोनों आमने-सामने आ गए हैं, जिससे कैंपस का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। फिलहाल कॉलेज परिसर में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द दोषियों की पहचान करे, और अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करें।
