बरेली : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणामों में बरेली के तीन युवाओं ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है। बजरंग एन्क्लेव की रहने वाली सुरभि यादव ने अखिल भारतीय स्तर पर 14वीं रैंक हासिल की है, जबकि उत्कर्ष मिश्रा ने 337वीं रैंक और मिनहाज शकील ने 513वीं रैंक प्राप्त कर सिविल सेवा में जगह बनाई है। तीनों की इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। परिवार, रिश्तेदार और परिचित उन्हें लगातार बधाइयां दे रहे हैं।
चौथे प्रयास में सुरभि यादव ने हासिल की बड़ी सफलता
25 वर्षीय सुरभि यादव वर्तमान में दिल्ली में केंद्र सरकार के ‘माय भारत’ कार्यक्रम में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने जनवरी 2026 में ही यह पद संभाला था।सुरभि ने मीडिया को बताया कि उनका सपना बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का था। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 11वीं कक्षा में मानविकी विषय चुना।उन्होंने दिल्ली से इतिहास ऑनर्स में स्नातक किया और सिविल सेवा की तैयारी के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया के कोचिंग बैच से जुड़ीं। चौथे प्रयास में उन्हें यह बड़ी सफलता मिली। सुरभि ने बताया कि 2024 में उनका प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। अंततः 2025 में उन्होंने शानदार रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा कर लिया।
चयन की खबर सुनकर भावुक हुआ परिवार
सुरभि ने बताया कि जैसे ही उन्होंने अपने चयन की जानकारी परिवार को दी, उनकी मां की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। उनके पिता राकेश यादव वाराणसी में पुलिस विभाग में तैनात हैं। सुरभि का कहना है कि सिविल सेवा की तैयारी में समय गिनने से ज्यादा जरूरी है कि उम्मीदवार अपने लक्ष्य पर लगातार ध्यान बनाए रखें।
19 लाख का पैकेज छोड़कर बने अफसर
जीजीआईसी रोड के रहने वाले उत्कर्ष मिश्रा ने यूपीएससी में 337वीं रैंक हासिल की है। यह उनका पांचवां प्रयास था और वह अपने परिवार में सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं। उत्कर्ष ने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में नौकरी की, जहां उन्हें लगभग 19 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिल रहा था। नौकरी के दौरान उन्होंने महसूस किया कि समाज के लिए सीधे काम करने का अवसर सिविल सेवा में ही मिल सकता है। इसके बाद उन्होंने 2021 में नौकरी छोड़कर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। चार बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पांचवें प्रयास में सफलता हासिल कर ली।
घर का माहौल बना प्रेरणा
उत्कर्ष के पिता चंद्रेश कुमार मिश्रा घर के पास ही कोचिंग संस्थान चलाते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। उनके भाई ने भी आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की है और एक निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। उत्कर्ष का कहना है कि यूपीएससी की मुख्य परीक्षा सबसे कठिन होती है, क्योंकि इसमें उत्तर लेखन की चुनौती सबसे बड़ी होती है। उन्होंने अपनी अधिकतर तैयारी ऑनलाइन माध्यम से की। हालांकि, उत्कर्ष का कहना है कि वह अपनी वर्तमान रैंक से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और बेहतर रैंक के लिए आगे फिर से प्रयास करेंगे।
रिछा के मिनहाज शकील ने भी बढ़ाया जिले का मान
बहेड़ी क्षेत्र के रिछा कस्बे के रहने वाले मिनहाज शकील ने यूपीएससी में 513वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता एडवोकेट शकील बहेड़ी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि रिछा कस्बे से यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले मिनहाज पहले युवा हैं। मिनहाज की शुरुआती पढ़ाई पांचवीं तक रिछा और बहेड़ी में हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा छह से 11 तक अलीगढ़ में पढ़ाई की और 12वीं की परीक्षा कोटा से पास की। आगे चलकर उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी शुरू की और अब सफलता हासिल की।
जिले में खुशी की लहर
तीनों युवाओं की सफलता से बरेली जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। परिवार, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने इसे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया है। सुरभि यादव, उत्कर्ष मिश्रा और मिनहाज शकील की सफलता यह साबित करती है कि लगातार मेहनत, धैर्य और स्पष्ट लक्ष्य के साथ किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि अब बरेली और आसपास के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बन गई है।
