बरेली: शहर के मोहम्मदगंज गांव में निजी आवास में सामूहिक नमाज़ रोके जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बरेली के जिलाधिकारी और एसएसपी को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजी स्थान पर प्रार्थना के लिए किसी प्रकार की सरकारी अनुमति आवश्यक नहीं होती।

गांव में शांति, पुलिस सतर्क
आज जुमे के मद्देनज़र गांव में पुलिस-प्रशासन पहले से अलर्ट रहा। बिशारतगंज थाना सहित आसपास के थानों की फोर्स तैनात की गई। प्रशासन के अनुसार फिलहाल गांव में शांति-व्यवस्था कायम है, किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है और शरारती तत्वों पर निगरानी रखी जा रही है। जिन मकानों पर ‘बिकाऊ’ लिखा गया था, उन्हें भी हटवाया जा रहा है।
विरोध के बाद बढ़ा था तनाव
बताया गया कि एक निजी मकान में सामूहिक नमाज़ का वीडियो सामने आने के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा हुआ। विरोध के दौरान कुछ घरों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ जैसे संदेश लिखे गए और पलायन की धमकियों की चर्चा भी हुई। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नमाज़ रुकवाई और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
दोनों पक्षों के दावे
हिंदू पक्ष का कहना था कि गांव में किसी भी समुदाय का कोई धार्मिक स्थल नहीं है और वर्षों पहले यह सहमति बनी थी कि मस्जिद या मंदिर का निर्माण नहीं होगा। आरोप लगाया गया कि मकान के नाम पर ढांचा खड़ा कर वहां सामूहिक नमाज़ शुरू की गई। वहीं, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि न तो मदरसा बनाया जा रहा था और न ही मस्जिद, निर्माण पशुओं के चारे और आवास के लिए बताया गया।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
मामला अदालत पहुंचने पर डिवीजन बेंच ने प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि निजी परिसरों में प्रार्थना पर रोक लगाना कानूनसम्मत नहीं है। इसी आधार पर अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई और डीएम-एसएसपी से जवाब मांगा गया। वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि गांव में पलायन जैसी कोई स्थिति नहीं है और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। सुरक्षा के लिहाज़ से पर्याप्त पुलिस बल तैनात है।
