बरेली : यूपी के बरेली में शनिवार को एक संवेदनशील प्रशासनिक कार्रवाई के बाद माहौल गर्मा गया।बरेली देहात के भोजीपुरा थाना क्षेत्र के घंघौरा पिपरिया गांव में सरकारी बंजर भूमि पर बने अवैध ढांचे (मस्जिद) को प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। मगर, इस कार्रवाई के बाद भीम आर्मी ने कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित कलेक्ट्रेट परिसर पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, और प्रशासन पर बिना अनुमति मस्जिद गिराने का आरोप लगाया।
एक घंटे में ढहाया अवैध ढांचा, भारी पुलिस बल रहा तैनात
प्रशासन ने शनिवार दोपहर करीब 12 बजे कार्रवाई शुरू की। करीब 300 वर्गगज में बनी मस्जिद को एक घंटे के भीतर बुलडोजर से गिरा दिया गया और बाद में मलबा भी हटवा दिया गया। कार्रवाई के दौरान सीओ हाईवे के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस और पीएसी बल तैनात रहा। मौके पर एसडीएम सदर प्रमोद कुमार और तहसीलदार भानु प्रताप सिंह मौजूद रहे। कड़े सुरक्षा इंतजामों के चलते मौके पर किसी तरह का विरोध दर्ज नहीं हो सका।
सरकारी बंजर भूमि पर अवैध निर्माण, 23 साल चला कानूनी विवाद
सदर तहसील प्रशासन के अनुसार यह मस्जिद गाटा संख्या 1474ख, श्रेणी-पांच की सरकारी बंजर भूमि पर बनी थी। इस जमीन को लेकर वर्ष 2002 में ग्राम सभा ने तहसीलदार सदर कोर्ट में वाद दाखिल किया था। 10 जनवरी 2003 को तहसीलदार कोर्ट ने बेदखली का आदेश पारित किया। इसके बाद मामला अपर जिला जज / फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 में गया। 28 अक्टूबर, 2025 को अदालत ने तहसीलदार कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए विपक्षी का मुकदमा खारिज कर दिया। न्यायिक बाधाएं समाप्त होने के बाद प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए कार्रवाई की।
अवैध कब्जेदारों पर जुर्माना भी वसूला
एसडीएम सदर प्रमोद कुमार ने बताया कि बेदखली की प्रक्रिया के तहत मोहम्मद बक्श और मुशर्रफ पर 272 रुपये का जुर्माना और 10 रुपये निष्पादन शुल्क पहले ही वसूला जा चुका है। ध्वस्तीकरण के लिए 10 सदस्यीय टीम गठित की गई थी, जिसमें तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल शामिल रहे।
भीम आर्मी ने लगाए ये आरोप
भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने बिना अनुमति मस्जिद गिराने का आरोप लगाया। इस कार्रवाई के विरोध में भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि मस्जिद करीब 50 साल पुरानी थी। बिना पूर्व सूचना और अनुमति के बुलडोजर चलाया गया। धार्मिक स्थल को जानबूझकर निशाना बनाया गया। भीम आर्मी ने इसे “मस्जिद शहीद करना” बताते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रशासन का पक्ष- कोर्ट के आदेश का पालन अनिवार्य
प्रशासन ने मीडिया को बताया कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक भावना के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन और सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए की गई है। अधिकारियों ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और ऐसे मामलों में आगे भी कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
