बरेली: बरेली के अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-5/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट (एचजेएस) तबरेज अहमद ने शुक्रवार को करीब 18 साल पुराने सनसनीखेज हत्याकांड में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। हाफिजगंज थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव में वर्ष 2008 में हुई हत्या के मामले में अदालत ने सभी मुख्य दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद इंसाफ मिला है। अदालत ने नन्हें उर्फ रणजीत, उसके भाई पूर्व ग्राम प्रधान संजय, सोमपाल, गुड्डा उर्फ विक्रम और थाना नवाबगंज क्षेत्र के सैदपुर ठिरिया निवासी भजन लाल को हत्या का दोषी करार दिया है।वहीं इस मामले में एक अन्य आरोपी धर्मपाल की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी, जिसके चलते उसके खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया। यह आरोपियों के पिता थे।
पुआल से रास्ता बंद करने को लेकर हुआ था विवाद
इस मामले की शुरुआत गांव में पुआल से रास्ता बंद करने को लेकर हुए विवाद से हुई थी। मृतक सुखलाल के भाई सतीश द्वारा थाना हाफिजगंज में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, पहले दिन विवाद को ग्रामीणों ने शांत करा दिया था,लेकिन अगले ही दिन मामला हिंसक हो गया।
घर में घुसकर किया गया हमला, मौके पर मौत
एफआईआर के मुताबिक, 19 मार्च 2008 की शाम सतीश अपने परिवार के साथ घर पर मौजूद था। वह लोग आपस में बात कर रहे थे, तभी नन्हें उर्फ रणजीत, ग्राम प्रधान संजय, सोमपाल, गुड्डा उर्फ विक्रम, भजन लाल और धर्मपाल हथियारों से लैस होकर घर में घुस आए।आरोप है कि आरोपियों के पास तमंचे और बंदूकें थीं और उन्होंने गाली-गलौज करते हुए हमला शुरू कर दिया। जब सतीश के भाई सुखलाल ने विरोध किया तो उस पर लाइसेंसी बंदूक से गोली चला दी गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने सतीश के पिता पर भी जानलेवा हमला किया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। महिलाओं और अन्य परिजनों के साथ भी मारपीट की गई, जिससे गांव में दहशत फैल गई।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
इस घटना के बाद पुलिस ने धारा 147, 148, 149, 302, 307 और 450 IPC के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से अवैध हथियार भी बरामद किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की। वहीं गुड्डा उर्फ विक्रम और सोमपाल के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत अलग से मुकदमा चलाया गया।
दो मुकदमों की एक साथ हुई सुनवाई
एक ही घटना से जुड़े दो अलग -अलग मुकदमे दर्ज होने के कारण अदालत ने दोनों मामलों को जोड़कर एक साथ सुनवाई के आदेश दिए। राज्य बनाम नन्हें उर्फ रणजीत एवं अन्य को मुख्य केस बनाया गया, जिसमें सभी गवाहों और साक्ष्यों को रिकॉर्ड किया गया।
गवाहों और सबूतों से सिद्ध हुआ अपराध
करीब कई वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अनेक गवाह पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और बरामद हथियारों ने अभियोजन की कहानी को मजबूत किया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया।
उम्रकैद के साथ जुर्माना भी
कोर्ट ने सभी दोषियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दंगा, जानलेवा हमला, अवैध रूप से घर में घुसने और गिरोहबंदी के मामलों में अलग-अलग अवधि की अतिरिक्त सजाएं और भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
पीड़ित परिवार को मिला इंसाफ
करीब 18 साल बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैसले की चर्चा है। लोगों का कहना है कि “न्याय भले देर से मिला, लेकिन सही मिला।” इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिगंबर पटेल और मनोज बाजपेई, जबकि अभियुक्त पक्ष की ओर से अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह और सुबोध कुमार सिंह ने पैरवी की।
