बारामती : महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की अटकलों के बीच एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने साफ कहा है कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। बारामती में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने कहा कि सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण की खबर उन्हें भी केवल मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए ही मिली है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के किसी कार्यक्रम की जानकारी उन्हें पार्टी स्तर पर नहीं दी गई है।
शरद पवार ने बताया कि 17 जनवरी को गोविंदबाग में उनकी और अजित पवार की एक बैठक हुई थी, जिसमें एनसीपी के दोनों गुटों को एकजुट करने को लेकर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि दोनों गुटों के विलय की पहल दिवंगत अजित पवार की इच्छा थी और इसी दिशा में बातचीत भी शुरू हो चुकी थी। शरद पवार के मुताबिक, अजित पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल के बीच विलय को लेकर चर्चा हुई थी और इसकी संभावित तारीख 12 फरवरी तय की गई थी। लेकिन उससे पहले ही अजित पवार का असामयिक निधन हो गया, जिससे यह प्रक्रिया अधूरी रह गई।
जब उनसे पूछा गया कि क्या पवार परिवार का कोई सदस्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होगा, तो शरद पवार ने दोहराया कि उन्हें ऐसे किसी आयोजन की जानकारी ही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह फैसला एनसीपी ने अपने स्तर पर लिया होगा। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कुछ नेताओं ने इस दिशा में पहल की होगी। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे द्वारा जल्दबाजी में फैसले लिए जाने के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि दोनों दलों के साथ मिलकर काम करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और इस पर जल्द निर्णय लिया जाना था, लेकिन अजित पवार के निधन के बाद परिस्थितियां बदल गईं।
वहीं, एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की स्थिति में एनडीए में शामिल होने के सवाल पर शरद पवार ने साफ इनकार करते हुए कहा कि इस तरह की चर्चाएं केवल मीडिया में चल रही हैं, जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ भी नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शरद पवार अपने दिवंगत भतीजे अजित पवार को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि अजित पवार एक सक्षम, कर्मठ और जनता से जुड़े हुए नेता थे, जो लोगों की समस्याओं को गंभीरता से समझते थे और हमेशा न्याय के लिए खड़े रहते थे। शरद पवार ने कहा कि बारामती की जनता ने हमेशा अजित पवार का साथ दिया और उन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटने का काम नहीं किया। उनके निधन से पूरे राजनीतिक और सामाजिक जगत को गहरा आघात पहुंचा है, लेकिन मौजूदा हालात में मजबूती के साथ आगे बढ़ना जरूरी है।
