मथुरा : मंगलवार तड़के करीब 4 बजे यमुना एक्सप्रेस-वे पर ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर देखने-सुनने वाले की रूह कंपा दी। थाना बलदेव क्षेत्र के माइलस्टोन 127 पर घने कोहरे के चलते 7 बसें और 3 कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते कई बसों में आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 4 लोगों की जिंदा जलकर मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 150 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। चश्मदीदों के मुताबिक यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अचानक कोहरा इतना घना हो गया कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। आगे चल रही एक बस ने जैसे ही रफ्तार धीमी की, पीछे से आ रही बस उससे टकरा गई। फिर एक के बाद एक वाहन भिड़ते चले गए। धमाकों की आवाजें ऐसी थीं मानो बम फट रहे हों। आग की लपटों ने बसों को अपनी चपेट में ले लिया और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।

एक पल की चूक, जिंदगी भर का दर्द
दिल्ली जा रही यात्री महिमा पांडे बताती हैं कि उनकी बस में तीन बार टक्कर लगी। इसके बाद आग लग गई। लोग खिड़कियों के शीशे तोड़कर जान बचाने के लिए कूदते नजर आए। कई यात्री अपना सारा सामान, मोबाइल, लैपटॉप तक खो बैठे। कुछ लोग तो आग की चपेट में आकर बाहर भी नहीं निकल सके। रेस्क्यू में जुटे स्थानीय युवक योगेंद्र ने बताया कि जब वह सुबह रनिंग के लिए पहुंचे तो चारों तरफ हाहाकार मचा था। अब तक 8–9 बुरी तरह जले शव बाहर निकाले जा चुके हैं। कई बसों में मानव अंग फंसे हुए मिले, जिन्हें निकालने में घंटों लग गए।
सड़कें जब जलती हैं, इंसानियत रोती है
हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस, फायर ब्रिगेड, NHAI और SDRF की टीमें आग बुझाने और रेस्क्यू में जुटीं। 12 से ज्यादा फायर ब्रिगेड और 14 से अधिक एम्बुलेंस मौके पर तैनात की गईं। करीब 20 एम्बुलेंस के जरिए 150 के आसपास घायलों को अस्पताल भेजे जाने की बात भी सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन की लगातार निगरानी की और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया।
सफर सुरक्षित हो, यही सबसे बड़ी राहत है
फिलहाल एक्सप्रेस-वे से जले हुए वाहनों का मलबा हटाया जा रहा है। दिल्ली जाने वाली लेन बंद कर दी गई है और एक लेन से आवागमन चालू है। यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है क्या कोहरे में रफ्तार और सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज करना हमारी मजबूरी है, या यह लापरवाही हर बार किसी की जिंदगी छीन लेती रहेगी? यमुना एक्सप्रेस-वे पर फैली राख अब भी उस भयावह सुबह की गवाही दे रही है।
