महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 198वीं जयंती सादगी से मनाई, आदर्शों को बताया आज के समाज के लिए प्रासंगिक
लखनऊ : महान समाज सुधारक और क्रांतिकारी विचारक महात्मा ज्योतिराव गोविंद राव फुले की 198वीं जयंती समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय, लखनऊ में सादगी और सम्मान के साथ मनाई गई। महात्मा फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। महात्मा ज्योतिबा फुले ने 19वीं सदी में समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, स्त्री-पुरुष असमानता और अंधविश्वास के विरुद्ध संघर्ष कर समाज सुधार को एक नई दिशा दी थी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा फुले ने महिला शिक्षा, दलित उत्थान और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने ‘सत्य शोधक समाज’ की स्थापना कर हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों की आवाज बुलंद की।
सामाजिक कुप्रथाओं का किया विरोध
सपा प्रमुख ने कहा कि महात्मा फुले ने बाल विवाह, विधवा उपेक्षा जैसी सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध किया और समाज को जागरूक करने का काम किया। उन्होंने भारत में महिला शिक्षा की नींव रखी और पहला स्कूल खोला। यहां उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले शिक्षिका के रूप में कार्यरत रहीं। उनके विचार और आदर्श आज भी हमारे समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। इस दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद अरविंद सिंह, एमएलसी किरन पाल कश्यप और पूर्व एमएलसी रामवृक्ष सिंह यादव ने भी महात्मा फुले को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प
इस दौरान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसमें डॉ. राजवर्धन सिंह जाटव, डॉ. जयवीर पासी, मनीष सिंह (प्रवक्ता), प्रीति तिवारी, संगीता यादव, मनोज पासवान, डॉ. हरिश्चन्द, राधेश्याम सिंह, विजय पाल सैनी, नरेन्द्र सिंह यादव, धीरज प्रधान, राधेश्याम सैनी, गौरव कश्यप, डॉ. धीरेन्द्र कुमार सैनी, सुरेन्द्र कश्यप, चंद्रपाल कश्यप, सोनू सैनी, संदीप कुमार सैनी, डॉ. मोहम्मद फैजान खान, मुकुट सिंह, राजेश कुमार यादव, दौलतराम माली, अभय सैनी, अकरम उर्फ बबलू और शिवशंकर लोधी आदि मौजूद थे। सपाइयों ने महात्मा फुले की जयंती को सिर्फ एक स्मृति आयोजन न मानकर, उनके आदर्शों को व्यवहार में लाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।बोले, जब तक समाज से भेदभाव और असमानता खत्म नहीं होगी, तब तक महापुरुषों के दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
