लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर शिक्षकों की पीड़ा और शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। शिक्षकों के नाम लिखे भावनात्मक पत्र में अखिलेश यादव ने स्वयं को “शिक्षक का बेटा” बताते हुए कहा कि “हर शिक्षक से मेरा पारिवारिक संबंध है और उनका दर्द मेरा दर्द है।”
स्कूल मर्जर और बेटियों की शिक्षा पर चिंता
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गांवों में स्कूल मर्जर को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गाँवों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी और सुरक्षा समस्याओं के कारण, मर्जर के बाद बच्चियाँ दूर के स्कूल नहीं जा पाएंगी। इससे स्त्री शिक्षा प्रभावित होगी और छात्रों की स्कूल से दूरी बढ़ेगी। ये समस्याएं वही समझ सकते हैं जो परिवार का दर्द जानते हों।
शिक्षक आंदोलनों को खुला समर्थन
सपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि शिक्षक संघ की मांगों के साथ वे पूरी मजबूती से खड़े हैं। 69000 सहायक शिक्षक भर्ती आंदोलन, बेसिक शिक्षक प्रयागराज भर्ती, और शिक्षा मित्रों के आंदोलन को उनका समर्थन पिछले दिनों से जारी है और आगे भी रहेगा।
भाजपा पर आरक्षण-विरोधी और शिक्षा-विरोधी होने का आरोप
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भाजपा की नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि “भाजपा शिक्षित समाज नहीं चाहती। क्योंकि पढ़ा-लिखा व्यक्ति सवाल करता है। सरकारी नौकरी होगी, तो आरक्षण भी देना पड़ेगा। इसी वजह से भाजपा के एजेंडे में नौकरी ही नहीं है।”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शिक्षकों को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो वे एक बड़े आंदोलन को मजबूर होंगे। जिससे हर क्षेत्र में ठहराव आ सकता है।
शिक्षकों के सम्मान पर सख्त रुख
एसपी चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार गुरुओं से अभद्र भाषा में बात करती है। उनका अपमान करती है। ऐसी सरकार संवेदनशील नहीं है और जो सरकार संवेदना न रखे, वो सरकार नहीं चाहिए। अंत में उन्होंने अपील कि “हमने ऑनलाइन हाज़िरी के समय भी कहा था कि शिक्षक का सम्मान और विश्वास ही अच्छी पीढ़ी बनाता है। भाजपा ने शिक्षकों का भरोसा खो दिया है। हम सदैव शिक्षक और शिक्षा के साथ हैं।”
