एसपी चीफ बोले- देश की 70 नदियां दूषित, सरकार क्यों खामोश? सोने की चिड़िया सिर्फ विज्ञापनों में’ आर्थिक नीतियों पर तंज
लखनऊ : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह दिन आज़ादी के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है और हमें संकल्प लेना चाहिए कि देश को संविधान की भावना के अनुरूप मजबूत हो।अखिलेश यादव ने कहा कि इतने वर्षों की आज़ादी के बाद यह सवाल जरूरी है कि देश आज किस स्थिति में खड़ा है। उन्होंने भुखमरी, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इन मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
‘संविधान को अपने से नीचे समझना ठीक नहीं’

सपा अध्यक्ष ने बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि “संविधान को अपने से नीचे समझना ठीक नहीं है।”उन्होंने सवाल उठाया कि जब सत्ता में बैठे लोगों ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमे हटवाए, तो यह संविधान के किस अनुच्छेद के तहत वैध ठहराया गया।
माघ मेले और शंकराचार्य विवाद का जिक्र
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हालिया माघ मेले और शंकराचार्य से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक और पुरातात्विक महत्व की चीजों पर कार्रवाई हुई, लेकिन सरकार को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में इसका जवाब जनता मतदान के जरिए देती है।
दुनिया में बढ़ती अस्थिरता पर चिंता

पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अंतरराष्ट्रीय हालात का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी। उन्होंने देशों के बीच चल रहे युद्धों और राजनीतिक अस्थिरता को मानवता के लिए गंभीर खतरा बताया।
देश की नदियां दूषित, सरकार पर सवाल
उन्होंने अखबारों में प्रकाशित विज्ञापनों का हवाला देते हुए कहा कि देश की करीब 70 नदियों के पानी में पारा, आर्सेनिक, यूरेनियम और औद्योगिक कचरे की मौजूदगी की बात सामने आ रही है। अखिलेश यादव ने सवाल किया कि जब निजी कंपनियों को इसकी जानकारी है, तो सरकार क्यों कार्रवाई नहीं कर रही।
‘सोने की चिड़िया सिर्फ विज्ञापनों में आर्थिक हालात पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अखबारों में देश को फिर से सोने की चिड़िया बनाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि सोने के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और आम आदमी आर्थिक दबाव में है। उन्होंने इसे बढ़ती महंगाई और आम लोगों की मजबूरी से जोड़ा।
गरीबी, बेरोजगारी और आत्मनिर्भरता पर सवाल

उन्होंने कहा कि देश में गरीबी और बेरोजगारी की स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रति व्यक्ति आय के सही आंकड़े तक सामने नहीं आ पा रहे। उन्होंने असंगठित क्षेत्र, फूड डिलीवरी करने वाले युवाओं पर बढ़ते दबाव और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
SIR नहीं, NRC से जुड़ी चिंता
अपने संबोधन के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि यह सिर्फ SIR का मुद्दा नहीं है, बल्कि NRC से जुड़ी आशंकाएं भी लोगों के मन में हैं।उन्होंने जनता से अपील की कि वे सजग रहें और संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
