एसपी चीफ ने कहा-नफरत के एजेंडे पर बनी फिल्में नाम बदलकर भी न हों रिलीज़
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा की राजनीति का मूल आधार समाज को बांटना और एक समाज के कुछ लोगों का इस्तेमाल उसी समाज के खिलाफ करना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सुनियोजित तरीके से किसी एक समाज को चिन्हित कर उसे अपमानित और आरोपित करने का काम करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा कभी बयानबाज़ी के जरिए, कभी बैठकों और नोटिसों के माध्यम से, तो कभी अपने पैसे के दम पर विज्ञापन, प्रचार सामग्री या फिल्में बनवाकर यह एजेंडा चलाती है, जब विवाद बढ़ जाता है तो भाजपा गिरगिट की तरह रंग बदलकर घड़ियाली आंसू बहाने लगती है और दिखावे के लिए झूठी कार्रवाई का नाटक करती है, जबकि सच्चाई यह है कि लक्षित समाज के अपमान और उत्पीड़न से भाजपा को अंदरूनी संतोष मिलता है।
फिल्मी मुद्दे पर सपा प्रमुख का कड़ा रुख
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वर्तमान में चल रहे एक फिल्मी विवाद पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उस फिल्म का नाम लेना भी संभव नहीं है, क्योंकि उसका शीर्षक न केवल आपत्तिजनक बल्कि बेहद अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि उस फिल्म का नाम लिखना भी भाजपा के उस समाज को तिरस्कृत करने के उद्देश्य को और आगे बढ़ाएगा। उन्होंने मांग की कि ऐसी फिल्म को नाम बदलकर भी रिलीज़ नहीं किया जाना चाहिए। सपा प्रमुख ने कहा कि जब तक ऐसी फिल्मों के निर्माताओं को आर्थिक नुकसान नहीं होगा, तब तक इस तरह की विभाजनकारी और अपमानजनक फिल्मों का निर्माण बंद नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे के लालच में भाजपा का एजेंडा चलाने वाले लोग पैसे के सिवा किसी के सगे नहीं होते।
यह रचनात्मक स्वतंत्रता नहीं, रचनात्मक समझ का मामला
एसपी चीफ ने साफ कहा कि यह मामला ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ या ‘क्रिएटिव लिबर्टी’ के हनन का नहीं है, बल्कि ‘रचनात्मक समझ’ और ‘क्रिएटिव प्रुडेंस’ का है। यदि कोई फिल्म पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर, सोची-समझी साजिश के तहत किसी एक पक्ष या समाज की भावनाओं को आहत करती है, तो उसे मनोरंजन नहीं कहा जा सकता।उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उद्देश्य मनोरंजन नहीं है, तो फिर किसी एक समाज को बदनाम करने के पीछे छिपे एजेंडे और उसके पीछे मौजूद लोगों का पर्दाफाश होना चाहिए। यह भी सामने आना चाहिए कि कौन और क्यों अपना पैसा व दिमाग सामाजिक एकता के खिलाफ और विध्वंसकारी कार्यों में लगा रहा है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी एक सीमा
सपा प्रमुख ने कहा कि अभिव्यक्ति और रचनात्मक स्वतंत्रता तभी तक स्वीकार्य है, जब तक वह किसी अन्य की गरिमा, सम्मान और प्रतिष्ठा का हनन न करे। यदि जानबूझकर किसी समाज या व्यक्ति के मान -सम्मान को ठेस पहुंचाई जाती है, तो ऐसी दुराग्रही रचनात्मकता पर रोक लगाना रचनात्मकता का हनन नहीं कहा जा सकता।
“सिनेमा समाज का दर्पण, उसे मैला नहीं होना चाहिए”
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि सिनेमा को समाज का दर्पण माना जाता है, लेकिन यह दर्पण मैला और मलिन नहीं होना चाहिए। समाज में सौहार्द, एकता और आपसी सम्मान बढ़ाने की बजाय यदि सिनेमा नफरत और विभाजन फैलाए, तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
18,727 सरकारी स्कूल बंद करना सामाजिक अपराध, ‘पीडीए पाठशाला’ आंदोलन बनेगा जनआंदोलन
एसपी चीफ अखिलेश यादव ने देश में 18,727 सरकारी स्कूल बंद किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।उन्होंने कहा कि अब ‘पीडीए पाठशाला’ का सांकेतिक आंदोलन वास्तविक जनआंदोलन में बदलेगा, तभी शोषित-वंचित समाज की पीढ़ियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकेंगी। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा की शिक्षा -विरोधी सोच के कारण सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है, जिससे भाजपा की रूढ़िवादी और संकीर्ण सोच को चुनौती मिलती है, इसलिए भाजपा शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान के खिलाफ खड़ी है।
बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीनना एक सामाजिक अपराध
सपा प्रमुख ने कहा कि बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीनना एक सामाजिक अपराध है, जिसका सबसे अधिक नुकसान पीडीए समाज को होगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में शिक्षा एक निर्णायक मुद्दा बनेगा और महिलाएं भाजपा को सत्ता से बाहर करेंगी। अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि यदि सरकारी स्कूल बंद हुए तो निजी स्कूलों की लूट बढ़ेगी और आम आदमी की पूरी कमाई बच्चों की पढ़ाई पर खर्च हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार जनता किसी भी लालच में नहीं आएगी और भाजपा से 15 लाख रुपये के वादे का हिसाब मांगेगी।
चीनी मांझे पर अखिलेश यादव का तंज, X पर वीडियो शेयर कर उठाए सवाल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए चीनी मांझे को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि पीछे के घर से गिरी कटी पतंग में उन्हें चीनी मांझा लगा हुआ दिख रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी सरकार ने चीनी मांझे के इस्तेमाल और बिक्री पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार के फैसले के मुताबिक, चीनी मांझे से मौत होने पर अब इसे हत्या माना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया है कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की होगी और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
