राम मंदिर चंदा विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CBI जांच और FIR की मांग वाली याचिका पर 29 जून को होगा उल्लेख
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 29 जून को मामला उल्लेखित करने को कहा
नई दिल्ली : अयोध्या के राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मामले में एफआईआर दर्ज करने, सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की मांग की गई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 29 जून को मामले का उल्लेख करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि याचिका पंजीकृत हो चुकी है, लेकिन अब तक सुनवाई की तारीख निर्धारित नहीं हुई है। इस पर पीठ ने कहा कि यदि याचिका में कोई तकनीकी कमी नहीं है तो रजिस्ट्री उसे सूचीबद्ध करेगी। बाद में याचिकाकर्ता के अनुरोध पर अदालत ने कहा कि वह 29 जून को मामले का उल्लेख कर सकते हैं।
CBI जांच और FIR दर्ज करने की मांग
याचिका में आरोप लगाया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच स्वतंत्र और पेशेवर एजेंसी से कराई जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मामले में एफआईआर दर्ज कर सीबीआई के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम गठित की जाए। याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
बिना FIR के जांच शुरू होने पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिना एफआईआर दर्ज किए जांच शुरू की गई, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। याचिका में कहा गया है कि वित्तीय मामलों की जांच के लिए अनुभवी और स्वतंत्र एजेंसी की आवश्यकता है, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
ट्रस्ट के लिए निगरानी और ऑडिट व्यवस्था की मांग
याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को एक प्रभावी नियामक, निगरानी एवं ऑडिट तंत्र विकसित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे दानदाताओं और श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होगा तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका कम होगी।
13 जून को गठित हुई थी एसआईटी
गौरतलब है कि 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया था। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप चुकी है, हालांकि रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
VHP ने भी की समयबद्ध जांच की मांग
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि जांच अधिकतम चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए और फास्ट ट्रैक अदालत में रोजाना सुनवाई कर दोषियों को जल्द सजा दिलाई जानी चाहिए।
श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला
याचिका में कहा गया है कि चाहे आरोप सही साबित हों या नहीं, लेकिन कथित अनियमितताओं की खबरों ने देशभर के करोड़ों राम भक्तों और दानदाताओं के बीच चिंता पैदा की है। ऐसे में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।
