दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज देश की राजनीति और इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भले ही आज सिंध की जमीन भारत का हिस्सा न हो, लेकिन सभ्यता और संस्कृति की दृष्टि से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। राजनाथ सिंह ने कहा, “जहां तक जमीन का सवाल है, सीमाएं बदल सकती हैं। कौन जाने, कल सिंध फिर से भारत में आ जाए।” मंत्री ने यह भी बताया कि सिंधी हिंदू और कई मुसलमान आज भी सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं। उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी के कथन का हवाला देते हुए कहा कि सिंध में हिंदू अपनी भूमि के भारत से अलग होने को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।
अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों पर जोर
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि कई पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक समुदाय लंबे समय से पीड़ित हैं। उनके घर जलाए गए, बच्चों और महिलाओं के साथ क्रूरता की गई और कई को जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। जिन लोगों ने भारत में शरण ली, उनके साथ कई सरकारों ने अन्यायपूर्ण व्यवहार किया।
पूर्व सरकारों पर निशाना
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाया और कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण कुछ समुदायों के लोग अपमानित हुए। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन पीड़ितों के दर्द को समझा और नागरिकता अधिकार दिलाने के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया।
