पीलीभीत: सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नामों में बदलाव के मामले में दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब फॉर्म-8 के जरिए रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि जिन मतदाताओं के नाम पहले कथित तौर पर बदले गए थे, उनसे अब फॉर्म-8 पर हस्ताक्षर और पहचान संबंधी दस्तावेज लिए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के जरिए पुराने बदलावों को सामान्य गलती बताने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
फॉर्म-8 पर हस्ताक्षर कराने को लेकर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार के मुताबिक, 24 अक्टूबर को मतदेय स्थलों पर विशेष अभियान से संबंधित प्रेस नोट जारी होने के बाद उन्होंने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने मझोला स्थित नेहरू इंटर कॉलेज में गुलड़िया भंडारा से जुड़े बूथों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि तहसील में कुछ फॉर्म-8 तैयार किए गए, जिन पर तारीख दर्ज नहीं थी। उनका दावा है कि इन फॉर्मों पर मतदाताओं के नाम और मतदाता पहचान पत्र संख्या दर्ज कर उन्हें लेखपालों के माध्यम से बूथ स्तरीय अधिकारियों तक पहुंचाया गया। आरोप के मुताबिक, बूथ स्तरीय अधिकारियों से संबंधित मतदाताओं के हस्ताक्षर कराने और पहचान संबंधी दस्तावेज संलग्न कर फॉर्म वापस लेने को कहा गया। कुमुद गंगवार ने सवाल उठाया कि यदि ये फॉर्म पहले से भरे गए थे, तो उनकी तारीख और आवेदन से संबंधित रिकॉर्ड क्या हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती कि कितने फॉर्म तैयार किए गए, किन मतदाताओं से संपर्क हुआ या वास्तव में कितने फॉर्मों पर हस्ताक्षर कराए गए।
दो एसडीएम और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ दर्ज है प्राथमिकी
इससे पहले कांग्रेस की ओर से सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में 13,150 रिकॉर्ड में बदलाव, 884 नाम हटाए जाने और 2,600 गैर-निवासियों के नाम जोड़े जाने के आंकड़े सामने रखे गए थे। इन आरोपों के बाद दो एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी तथा कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। विपक्ष की ओर से कुल 16,504 रिकॉर्ड में गड़बड़ी का दावा भी किया गया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी पक्ष इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज कर चुका है।
जांच के बीच रिकॉर्ड के सत्यापन पर नजर
मतदाता सूची में बदलाव और फॉर्म-8 की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित आवेदन कब तैयार हुए, मतदाताओं की सहमति और पहचान का सत्यापन किस तरह किया गया तथा पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं। सिर्फ प्रेस नोट जारी होने या फॉर्म भरवाए जाने से किसी गड़बड़ी अथवा साजिश की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए मूल आवेदन, तारीखों, संबंधित अभिलेखों और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का मिलान आवश्यक है। फिलहाल, दर्ज प्राथमिकी के मामले में पुलिस विवेचना कर रही है। प्रशासन की ओर से भी मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया जारी है, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम प्रभावित न हो। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में अंतर तकनीकी या प्रक्रियात्मक कारणों से हुआ अथवा इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
