एआरटीओ कार्यालय के ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर आईपी कैमरे और सेंसर लगाने की तैयारी, प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का इंतजार; व्यवस्था लागू होने पर ड्राइविंग परीक्षा की निगरानी और रिकॉर्डिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
पीलीभीत: ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए पीलीभीत में हाईटेक व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। अब स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए होने वाले परीक्षण में आईपी कैमरों और सेंसर की मदद से आवेदकों की ड्राइविंग पर नजर रखने की योजना बनाई गई है। इसके लिए एआरटीओ कार्यालय के ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर आधुनिक उपकरण लगाने का प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलने के बाद ही परिवहन विभाग इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा। इस योजना का उद्देश्य ड्राइविंग परीक्षण को अधिक पारदर्शी बनाना, अनियमितताओं पर रोक लगाना और सड़क पर वाहन चलाने के लिए योग्य चालकों को तैयार करना है।
जुगाड़ और सिफारिश पर लगेगी रोक, कैमरों में दर्ज होगी परीक्षा
प्रस्ताव के तहत ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर आईपी कैमरे लगाए जाने की योजना है, जिनकी मदद से आवेदकों की ड्राइविंग की निगरानी और रिकॉर्डिंग की जा सकेगी। परीक्षण के दौरान आवेदक ने निर्धारित मानकों का पालन किया या नहीं, इसकी समीक्षा रिकॉर्डिंग के आधार पर की जा सकती है। योजना में सेंसर के इस्तेमाल का भी प्रस्ताव है। निर्धारित मानकों के उल्लंघन पर सेंसर से संकेत मिलने की व्यवस्था उपकरणों और तकनीकी प्रणाली की क्षमता पर निर्भर करेगी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-कौन से परीक्षण पूरी तरह स्वचालित होंगे और पास या फेल करने के लिए किन तकनीकी मानकों का इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रस्ताव तत्कालीन एआरटीओ वीरेंद्र सिंह की ओर से भेजा गया था। फिलहाल विभाग को इसकी मंजूरी मिलने का इंतजार है।
जिले में ढाई लाख से अधिक दोपहिया वाहन पंजीकृत
पीलीभीत में वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंस धारकों की संख्या को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में दो लाख 55 हजार 490 से अधिक दोपहिया वाहन, 21 हजार 536 कारें और करीब 20 हजार व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। वहीं, जिले में कुल दो लाख 12 हजार 892 ड्राइविंग लाइसेंस धारक हैं। इनमें एक लाख 73 हजार 958 पुरुष शामिल हैं। ऐसे में ड्राइविंग परीक्षण की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल उपयोगी साबित हो सकता है।
क्या होते हैं आईपी कैमरे, कैसे करेंगे काम?
आईपी यानी इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरे ऐसे डिजिटल कैमरे होते हैं, जो नेटवर्क के माध्यम से वीडियो और अन्य डेटा भेजते हैं। इनकी मदद से किसी स्थान की लाइव निगरानी की जा सकती है और वीडियो रिकॉर्डिंग को नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर या निर्धारित सर्वर पर सुरक्षित रखा जा सकता है। ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर इन कैमरों का इस्तेमाल होने से आवेदकों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जा सकेगी। हालांकि, वाहन की गति, संकेतक, हेलमेट और सीट बेल्ट जैसी चीजों की स्वचालित पहचान कैमरे की क्षमता, सॉफ्टवेयर और लगाए गए सेंसर पर निर्भर करेगी। केवल आईपी कैमरे लगाने से इन सभी मानकों की स्वतः जांच सुनिश्चित नहीं होती। फिलहाल, पीलीभीत में यह योजना प्रस्ताव के स्तर पर है। मंजूरी और तकनीकी व्यवस्था तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि ड्राइविंग टेस्ट को किस तरह हाईटेक बनाया जाएगा।
