कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हादसे के बाद 25 लोग घायल, कई की हालत गंभीर; पूजा समिति के सचिव और उपाध्यक्ष समेत सात गिरफ्तार, टीएमसी ने भाजपा नेताओं पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाए
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना में 19 लोगों की मौत और 25 अन्य के घायल होने की खबर है। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई गई है। घटना के बाद प्रशासन ने बड़े पूजा पंडालों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने चोरबागान दुर्गा पूजा समिति के सचिव और उपाध्यक्ष समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
सातों आरोपियों को 10 दिन की पुलिस हिरासत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और भगदड़ के पीछे संभावित अव्यवस्थाओं तथा सुरक्षा इंतजामों में चूक की पड़ताल की जा रही है। घटना के बाद प्रशासन ने कोलकाता के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच भी शुरू कर दी है। हादसे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच जारी है।
टीएमसी का आरोप- भाजपा नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं?
भगदड़ की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। पार्टी ने कोलकाता पुलिस को टैग करते हुए सवाल उठाया कि आयोजन से जुड़े कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या उन्हें बचाया जा रहा है। टीएमसी ने अपने बयान में तीन नामों का उल्लेख किया है और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी के आरोपों पर संबंधित लोगों का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
देबदीप अधिकारी, विजय ओझा और तमोघना घोष के नाम पर विवाद
टीएमसी की ओर से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में देबदीप अधिकारी को मुख्य संरक्षक, विजय ओझा को अध्यक्ष और तमोघना घोष को मुख्य सलाहकार बताया गया है। पार्टी ने इन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं और पुलिस से कार्रवाई के बारे में जवाब मांगा है। यह पूरा मामला अब हादसे की जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। हालांकि, इन नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और इस मामले में उनकी किसी आपराधिक भूमिका का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
