दिल्ली : देश की राजधानी से करीब 136 किलोमीटर दूर, हरियाणा के हिसार जिले के छोटे-से गांव पेटवाड़ में तपती दोपहर में गेहूं की मड़ाई चल रही थी। तेज धूप में पसीने से भीगा एक दुबला-पतला किशोर थ्रेशर मशीन के पास खड़ा था। अचानक उसने मशीन बंद की, आसमान की ओर देखा और ऊँची आवाज में कहा “मैं अपनी जिंदगी बदल दूंगा।”
गांव के उसी सरकारी स्कूल में बोरी पर बैठकर पढ़ने वाला यह लड़का आगे चलकर भारत की न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा चेहरा बनेगा यह उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था। इस बच्चे का नाम है सूर्यकांत, जो आज भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। वह 24 नवंबर 2025 से 9 फरवरी 2027 तक लगभग 15 महीनों तक सुप्रीम कोर्ट की कमान संभालेंगे।
शुरुआत एक साधारण परिवार से
10 फरवरी 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्यकांत एक पूर्णतः साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता मदनगोपाल शास्त्री संस्कृत के शिक्षक थे, जबकि मां शशि देवी गृहिणी। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे सूर्यकांत बचपन से ही पढ़ाई और अनुशासन के प्रति गंभीर थे। पिता चाहते थे कि बेटा एलएलएम करे, लेकिन सूर्यकांत ने एलएलबी के बाद ही सीधे वकालत करने का निर्णय लिया और वही उनके सफर की असली शुरुआत बनी।
कानूनी सफर की ऊँचाइयाँ
1984 में एमडीयू रोहतक से कानून की पढ़ाई पूरी की।
1984–85: हिसार जिला अदालत में वकालत की शुरुआत।
1985 में चंडीगढ़ जाकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की।
2000 में महज 38 वर्ष की उम्र में हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने।
2004 में हाईकोर्ट जज नियुक्त हुए।
2018 में हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
2019 में सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुए।
महत्वपूर्ण फैसले
जस्टिस सूर्यकांत कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे
बिहार में 65 लाख मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाए जाने का मामला।
अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखने वाली संविधान पीठ का हिस्सा।
OROP नीति को संवैधानिक मान्यता देने वाला निर्णय।
असम में धारा 6A की संवैधानिक वैधता पर फैसला।
दिल्ली एक्साइज नीति केस में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ के सदस्य।
व्यक्तिगत जीवन
1980 में उनकी शादी सविता शर्मा से हुई, जो बाद में एक कॉलेज की प्रिंसिपल रहीं। उनकी दो बेटियाँ हैं, जो कानून की पढ़ाई कर रही हैं।
कवि, किसान और लेखक भी
न्यायपालिका के अलावा वह साहित्य और पर्यावरण प्रेम के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी एक कविता “मेंढ पर मिट्टी चढ़ा दो” छात्र जीवन में काफी प्रसिद्ध हुई थी। उन्होंने गांव में तालाब के पुनःनिर्माण में धन और पौधे दान किए। 1988 में उन्होंने “Administrative Geography of India” नाम की किताब भी लिखी थी।
विवादों से भी रहा रिश्ता
हिमाचल हाईकोर्ट में कार्यकाल के दौरान उन पर दो बार भ्रष्टाचार और लेन-देन के आरोप लगे। हालांकि दोनों ही मामलों में आरोप साबित नहीं हो सके।
