दरगाह आला हजरत पर शुरू हुआ 86वां दो रोजा उर्स, पहले दिन खत्म बुखारी शरीफ और जिलानी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा; देर रात तक चला तहरीरी और तकरीरी मुकाबला
बरेली: दरगाह आला हजरत पर आला हजरत फाजिले बरेलवी के बड़े साहिबजादे हुज्जातुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रजा खां साहब यानी हामिद मियां का 86वां दो रोजा उर्स-ए-हामिदी बृहस्पतिवार, 29 अक्टूबर को शुरू हुआ। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी की अध्यक्षता और सैयद आसिफ मियां की निगरानी में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पहले दिन खत्म बुखारी शरीफ की महफिल, जिलानी मियां के कुल शरीफ की रस्म और अखिल भारतीय तहरीरी, तकरीरी व मुशायरे का इनामी मुकाबला आयोजित हुआ।
खत्म बुखारी शरीफ की महफिल में छात्रों को दिया इल्म का संदेश
सुबह आठ बजे खत्म बुखारी शरीफ की महफिल शुरू हुई। मुफ्ती जईम रजा ने कुरान की तिलावत की, जबकि हाजी गुलाम सुब्हानी ने मिलाद शरीफ पढ़ी। इमाम अहमद रजा एकेडमी से आए शेखुल हदीस मुफ्ती हनीफ खां ने मदरसे के छात्रों को बुखारी शरीफ की आखिरी हदीस का दर्स दिया। उन्होंने दीन की शिक्षा हासिल करने, दूसरों तक इल्म पहुंचाने और उलेमा का सम्मान करने की बात कही। साथ ही बुखारी शरीफ की फजीलत भी बयान की। मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के सदर मुफ्ती आकिल रजवी ने छात्रों से मजहब और मसलक की खिदमत बिना किसी स्वार्थ और दिखावे के करने का आह्वान किया। मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि मदरसा मंजर-ए-इस्लाम से तालीम हासिल करने वाले छात्र दीन को दुनिया भर में आगे बढ़ाने का काम करें। उन्होंने मदरसे की स्थापना के उद्देश्य और उसके इतिहास पर भी रोशनी डाली। शायर-ए-इस्लाम महशर बरेलवी ने नात और मनकबत पेश की। कार्यक्रम का संचालन मुफ्ती अनस और मौलाना नदीम मंजरी ने किया।
जिलानी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा, देर रात तक चला मुकाबला
दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी के मुताबिक, सुबह साढ़े दस बजे जिलानी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा और शजरा नबीरे आला हजरत अहसन रजा तथा मुफ्ती अय्यूब नूरी ने पढ़ा। विशेष दुआ मुफ्ती सैयद कफील हाशमी ने कराई। इस दौरान कई उलेमा और गणमान्य लोग मौजूद रहे। रात नौ बजे अखिल भारतीय तहरीरी, तकरीरी और मुशायरे का मुकाबला शुरू हुआ। इसका मिसरा-ए-तरही था, “खुदा पर इसको छोड़ा है, वहीं जाने कि किया तुम हो।” मुकाबला देर रात तक जारी रहा। इसमें मुफ्ती सलीम नूरी, मुफ्ती अय्यूब नूरी, मुफ्ती मोइन बरकाती और मुफ्ती अख्तर हुसैन ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
30 अक्टूबर को कुल शरीफ और मदरसे की दस्तारबंदी
उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार, 30 अक्टूबर को फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी होगी। दिन में गुलपोशी और चादरपोशी का सिलसिला चलेगा। मुख्य कार्यक्रम रात नौ बजे शुरू होगा, जिसमें देशभर से आए नामचीन उलेमा तकरीर करेंगे। रात 10 बजकर 35 मिनट पर हुज्जातुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रजा खां के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद मदरसा मंजर-ए-इस्लाम का दीक्षांत समारोह यानी दस्तारबंदी आयोजित होगा। उर्स की व्यवस्थाओं में शाहिद नूरी, अजमल नूरी, परवेज नूरी, औरंगजेब नूरी, ताहिर अल्वी, मंजूर रजा, मुजाहिद बेग सहित अनेक लोग जुटे हुए हैं।
