सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में सभा के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे संगठन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर SIR पर रोक लगाने और जनांदोलनों के दमन पर कार्रवाई की उठाई मांग
बरेली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में बरेली में विभिन्न जनसंगठनों ने प्रदर्शन किया। सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में सभा आयोजित कर वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने और विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिसिया दमन को बंद करने की मांग उठाई।सभा के बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। सभा में इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास), पीयूसीएल और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन (क्रालोस) से जुड़े पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में नामों की स्थिति, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए। संगठनों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
SIR में 13 करोड़ से अधिक नाम प्रभावित होने का दावा
इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव ध्यान चंद्र मौर्य ने अपने संबोधन में दावा किया कि SIR के तहत देशभर में मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र स्थित बेला एस्टेट का उदाहरण देते हुए कहा कि पुनरीक्षण से पहले वहां मतदाता सूची में 729 नाम थे, जबकि 31 अगस्त की ड्राफ्ट सूची में केवल एक नाम बचा दिखाई दिया।उनके मुताबिक, इस तरह 728 नाम सूची में शामिल नहीं रहे।ध्यान चंद्र मौर्य ने दावा किया कि प्रभावित मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित दिखाया गया, जबकि वे उसी इलाके में रह रहे हैं। उन्होंने इस मामले को SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का उदाहरण बताते हुए पुनरीक्षण पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग की। हालांकि, 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के दावे को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के ड्राफ्ट चरण में अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं की श्रेणियों में रखे गए नामों की संख्या को अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए नामों के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए इन आंकड़ों और अलग-अलग इलाकों के मामलों की स्थिति को अंतिम सूची तथा संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर जांचना जरूरी है।
SIR को लेकर नागरिक अधिकारों पर सवाल
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के शहर सचिव कैलाश ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और उसके नेतृत्व पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश करने के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि SIR की आड़ में नागरिकता परीक्षण जैसी स्थिति पैदा होने और आम नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। कैलाश ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रक्रिया की समीक्षा करने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता और कानून में बदलाव पर उठाए सवाल
पीयूसीएल के प्रदेश अध्यक्ष टीडी भास्कर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित वर्ष 2023 के कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश की जगह कैबिनेट मंत्री को शामिल किए जाने और कानून की धारा 16 में दिए गए संरक्षण को लेकर सवाल उठते हैं। भास्कर ने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर चिंता पैदा होती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर मुद्दा बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया और आयोग की कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की जरूरत जताई।
दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन (क्रालोस) के बरेली सचिव हिमांशु ने दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और SIR रद्द करने की मांग को लेकर आयोजित विरोध के दौरान सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई तथा ट्रेन और मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियां लगाई गईं।
हिमांशु ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आम नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से संगठित होकर विरोध करने के अधिकार पर असर पड़ता है। उन्होंने बरेली में भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर हाउस अरेस्ट करने और उनके घरों पर पुलिस भेजे जाने के आरोप लगाए। क्रालोस के प्रतिनिधि ने जनांदोलनों के कथित दमन का विरोध करते हुए इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, बरेली में किन लोगों को किस आदेश के तहत रोका गया और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में प्रशासन का क्या पक्ष है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा
सभा के बाद विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और जनांदोलनों के कथित पुलिसिया दमन को बंद करने की मांग की गई।प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने, चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने और शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।
