महापौर डॉ. उमेश गौतम और नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने पूजन के बाद शुरू कराया संचालन, दिल्ली की पाथ्या एजेंसी संभालेगी जिम्मेदारी
बरेली : शहर में कूड़ा निस्तारण की लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम उठाया गया है।सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को शुभारंभ कर दिया गया। महापौर डॉ. उमेश गौतम और नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने विधि-विधान से पूजन के बाद प्लांट का संचालन शुरू कराया। इस प्लांट के जरिए शहर के 80 वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 500 टन कूड़े का निस्तारण किया जाएगा। प्लांट शुरू होने से बाकरगंज में जमा कचरे के पहाड़ को हटाने और शहर में कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था सुधारने की उम्मीद बढ़ी है।
सात बार टेंडर के बाद शुरू हो सका प्लांट
बरेली में ठोस कचरे के निस्तारण के लिए प्लांट स्थापित करने की कोशिश करीब 12 साल पहले शुरू हुई थी। वर्ष 2012-13 में रजऊ परसपुर में प्लांट लगाया गया था, लेकिन विवाद के बाद करीब एक महीने में ही उसका संचालन बंद हो गया। इसके बाद शहर में कूड़ा निस्तारण की समस्या लगातार बनी रही। वर्ष 2021 में सथरापुर में नए प्लांट के लिए करीब 20 हेक्टेयर भूमि पर परियोजना विकसित की गई।हालांकि, संचालन के लिए एजेंसी का चयन और निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण प्लांट लंबे समय तक शुरू नहीं हो सका। आखिरकार सातवीं बार निविदा प्रक्रिया के बाद जनवरी 2026 में दिल्ली की पाथ्या एजेंसी को संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। मशीनों की स्थापना और ट्रायल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्लांट का संचालन शुरू कर दिया गया है।
दिल्ली की पाथ्या एजेंसी करेगी संचालन
प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी दिल्ली की पाथ्या यानी पीपुल्स एसोसिएशन फॉर टोटल हेल्प यूथ एप्लाज एजेंसी को दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एजेंसी ने अपने खर्च से प्लांट में मशीनें स्थापित की हैं। नगर निगम की ओर से एजेंसी को प्रति टन कूड़े के निस्तारण के लिए 446 रुपये का भुगतान किया जाएगा। शहर से निकलने वाले कचरे को व्यवस्थित तरीके से निस्तारित करना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है। प्रतिदिन करीब 500 टन कचरे को निस्तारण की व्यवस्था होने से नगर निगम को शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गीले और सूखे कचरे का होगा अलग-अलग निस्तारण
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के मुताबिक, प्लांट में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके निस्तारित करने की व्यवस्था की गई है। गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने के साथ बायोगैस उत्पादन की भी योजना है। इस व्यवस्था से कचरे का उपयोगी प्रसंस्करण करने और उसे व्यवस्थित तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि, खाद और बायोगैस उत्पादन की वास्तविक क्षमता तथा उत्पादन शुरू होने की समयसीमा के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
बाकरगंज के कूड़े के पहाड़ से मिलेगी राहत?
बरेली में लंबे समय से बाकरगंज में जमा कचरा शहर की बड़ी समस्याओं में शामिल रहा है। रोजाना निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से यहां कचरे का ढेर बढ़ता गया। जिससे आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर आयुक्त के अनुसार, सथरापुर प्लांट शुरू होने के बाद शहर का नया कूड़ा बाकरगंज भेजना बंद किया जाएगा। इससे वहां जमा पुराने कचरे के निस्तारण में तेजी लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बाकरगंज में पुराने यानी लीगेसी वेस्ट के निस्तारण का काम भी चल रहा है। हालांकि, बाकरगंज में जमा पुराने कचरे को पूरी तरह हटाने में कितना समय लगेगा, इस बारे में कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है। प्लांट के नियमित संचालन और कचरे के परिवहन की व्यवस्था से ही इसके वास्तविक परिणाम स्पष्ट होंगे।
शहर के 80 वार्डों के कचरे का होगा प्रबंधन
बरेली के 80 वार्डों से प्रतिदिन लगभग 500 टन कूड़ा निकलता है। इतने बड़े पैमाने पर कचरे का निस्तारण नगर निगम के सामने लंबे समय से चुनौती रहा है। नई परियोजना शुरू होने से शहर के कचरे को एक निर्धारित स्थान पर पहुंचाकर उसके प्रसंस्करण की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। प्लांट के प्रभावी संचालन के लिए कूड़े का नियमित संग्रह, समय पर परिवहन, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण तथा मशीनों का सुचारु संचालन महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही बाकरगंज में जमा पुराने कचरे को हटाने की प्रक्रिया पर भी लोगों की नजर रहेगी।
शहर की सफाई व्यवस्था के लिए अहम कदम
सथरापुर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का शुरू होना बरेली की कचरा प्रबंधन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम है। करीब 12 साल से चली आ रही कोशिशों और कई चरणों की निविदा प्रक्रिया के बाद परियोजना का संचालन शुरू हुआ है। अब सबसे बड़ी चुनौती प्लांट को नियमित रूप से चलाने, प्रतिदिन निकलने वाले कचरे का प्रभावी निस्तारण करने और बाकरगंज में जमा पुराने कचरे को हटाने की होगी। यदि निर्धारित क्षमता के अनुरूप प्लांट का संचालन होता है, तो शहर में कूड़ा प्रबंधन की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
